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Atul Jain April 21, 2020

सह.सम्पादक अतुल जैन की रिपोर्ट

भोपाल।पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान पर मंत्रिमंडल के गठन के लिए भारी दवाब था। समकक्ष मित्र कमलनाथ की टीम काफी बयान बाजी कर रही थी। सीएम शिवराज सिंह ने मिनी मंत्रिमंडल की लिस्ट बनाकर दिल्ली भेज दी थी। करीब 5 दिन हो गए, भोपाल से दिल्ली गया शिवराज सिंह का मिनी मंत्रिमंडल अब तक अप्रूव होकर भोपाल वापस नहीं लौटा है। बस चर्चाओं, अफवाहों और कयासों का दौर जारी है। चलिए अपन तलाशते हैं मध्य प्रदेश का मंत्रिमंडल कहां गुम हो गया।

कमलनाथ की टीम ने मुद्दा उठाया था लेकिन अब चुप है

जब सारा मध्य प्रदेश कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए घरों में छुपा हुआ था। लोग टोटल लॉक डाउन का ना केवल खुद पालन कर रहे थे बल्कि दूसरों को भी प्रेरित कर रहे थे उस समय पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एवं उनकी टीम के कुछ नेता मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल का मुद्दा उठा रहे थे। निश्चित रूप से उन्होंने बड़े ही प्रभावी ढंग से मुद्दे को उठाया और उसका असर भी दिखाई दिया लेकिन पिछले 3 दिनों से कमलनाथ और उनकी टीम के लोग मंत्रिमंडल के मामले में चुप हैं।

टोटल लॉक डाउन में ज्योतिरादित्य सिंधिया, अमित शाह से मिलने गए थे

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वीडियो जारी करके बताया था कि वह खुद टोटल लॉक डाउन का कड़ाई से पालन कर रहे हैं। घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं लेकिन जैसे ही शिवराज सिंह चौहान की मिनी मंत्रिमंडल वाली लिस्ट भाजपा मुख्यालय पहुंची, ज्योतिरादित्य सिंधिया सब कुछ भूल कर अमित शाह से मिलने जा पहुंचे।

मध्य प्रदेश के मंत्रिमंडल में समस्या क्या है

शिवराज सिंह चाहते थे कि एक छोटा सा मंत्रिमंडल बना कर काम चलाया जाए। इसके बाद सभी लोग बैठकर विचार करेंगे और धूमधाम के साथ मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे।
ज्योतिरादित्य सिंधिया चाहते हैं कि उन सभी पूर्व विधायकों को मंत्री बनाया जाए जिन्होंने मंत्री पद पर रहते हुए इस्तीफा दिया था।
ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने सबसे खास तुलसीराम सिलावट को डिप्टी सीएम बनाना चाहते हैं।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से नरोत्तम मिश्रा का नाम चलाया गया था।
शिवराज सिंह चौहान 2-2 डिप्टी सीएम के फार्मूले पर तैयार नहीं है। RSS और BJP के कई दूसरे वरिष्ठ नेता भी इस फार्मूले से सहमत नहीं है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया स्वास्थ्य मंत्रालय तुलसीराम सिलावट को दिलवाना चाहते हैं जबकि नरोत्तम मिश्रा भाजपा की तरफ से घोषित स्वास्थ्य मंत्री हैं।
ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थक गोविंद सिंह राजपूत को परिवहन मंत्रालय दिलवाना चाहते हैं जबकि नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा देने वाले पंडित गोपाल भार्गव को भी महत्वपूर्ण मंत्रालय दिया जाना है। इसी क्षेत्र के भूपेंद्र सिंह परिवहन मंत्रालय के सबसे सशक्त दावेदार हैं।
वित्त मंत्रालय के लिए ना तो भाजपा के पास कोई अच्छा नाम है और ना ही ज्योतिरादित्य सिंधिया की टीम में कोई ऐसा है जो वित्त मंत्रालय संभाल सके। यशोधराराजे सिंधिया, राजेंद्र शुक्ला, अजय विश्नोई तथा तुलसी सिलावट जैसे नाम चर्चा में हैं लेकिन किसी के नाम पर संगठन/ सिंधिया सहमत नहीं है तो कोई खुद वित्त मंत्रालय संभालने के लिए तैयार नहीं है।

कुल मिलाकर मंत्रियों के नाम फाइनल हो गए लेकिन विभागों को लेकर लड़ाई तेज हो गई है। यह तो सभी जानते हैं कि जिस मामले में ज्योतिरादित्य सिंधिया का दखल शुरू हो जाए उसमें फैसला जल्दी से नहीं होता। इसलिए शिवराज सिंह का मंत्रिमंडल अभी तक दिल्ली में ही अटका हुआ है।

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