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manish kumat April 20, 2020

गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में फंसे आदिवासी मजदूरों के मामले में सांसद और विधायक में जुबानी जंग तेज


गुमानसिंह डामोर नहीं चाहते उक्त राज्यों में फंसे ग्रामीण जिले में आए, तो कांतिलाल भूरिया ने कहा कि सरकार लाने की व्यवस्था नहीं करेगी तो हम करेंगे


जयस ने सांसद को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें जिले के ग्रामीणों की चिंता नहींं, आदिवासी समाज का अपमान करने परे मांगे माफी


झाबुआ। कोरोना वायरस (कोविड-19) से फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित झाबुआ जिले से जहां जिला प्रषासन और पुलिस प्रषासन राहत महसूस कर रहा है तो इसी बीच क्षेत्रीय सांसद और क्षेत्रीय विधायक देष में लगे लॉकडाउन-02 के दौरान झाबुआ जिले के आदिवासी मजदूर, जो हजारों की संख्या में गुजरात, राजस्थान एवं महाराष्ट्र में इन दिनों फंसे हुए है, उन्हें झाबुआ जिले में लाने के मामले में जुबानी जंग तेज कर रहे है।
ताजा मामले में इस संबंध में क्षेत्रीय सांसद गुमानसिंह डामेर ने मप्र के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि झाबुआ जिला फिलहाल ग्रीन जोन में होकर कोरोना वायरस संक्रमित की संख्या यहां फिलहाल 0 है। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से इन राज्यों में रह रहे ग्रामीणों की झाबुआ जिले में प्रवेष पर फिलहाल रोक लगाई जाए, तो इसी बीच क्षेत्रीय विधायक कांतिलाल भूरिया ने भी मप्र के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि वह उक्त राज्यों में फंसे झाबुआ जिले की मजदूरों को अपने गंतव्य स्थल तक लाने की समुचित व्यवस्था करे, नहीं तो यह व्यवस्था जिले के विधायक मिलकर करेंगे। इसी बीच तीसरे पक्ष में जय आदिवासी युवा शक्ति मंच (जयस) के प्रदेष प्रवक्ता अनिल कटारा का बयान सामने आया है। जिसमें उन्होंने सांसद डामोर को आडे़ हाथों लेते हुए कहा कि सांसद ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में जिले के ग्रामीणों के लिए अमानवीय शब्दों का उपयोग किया है, इसके लिए सासंद आदिवासी समाज से माफी मांगे


सांसद को जिले की चिंता या ग्रामीणों से लगाव नहीं …. ?


सांसद श्री डामोर ने मप्र के मुख्यमंत्री जो पत्र लिखा है कि उसमें उन्हांने कहा है कि गुजरात, राजस्थान एवं महाराष्ट्र के ग्रामीण को झाबुआ जिले की सीमा में प्रवेष पर फिलहाल रोक लगाई जाए। ऐसे में दो पहलूओं में सांसद को या तो झाबुआ जिलेवासियों की चिंता है या फिर उन्हें गुजरात, राजस्थान एवं महाराष्ट्र मे बड़ं़ी तादाद में फंसे उन ग्रामीणों से कोई मतलब नहीं, जो इन राज्यों में बुरी तरह से फंसे होकर वहां उन्हें कई तरह की परेषानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर देष की जहां तमाम सरकारे अपने-अपने राज्य की जनता को सुरक्षित रखने के लिए बाहर से आने वालो को उनके राज्यों के क्षेत्रों में ही सुरक्षा की दृष्टि से भिजवाने की व्यवस्था कर रहीं है, ताकि लॉकडाउन के बीच लोग अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर अपने-अपने परिवारों के साथ सुरक्षित रह सके। इस तरह की व्यवस्था उत्तरप्रदेष में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राजस्थान में मुख्यमंत्री अषोक गेहलोत के साथ बिहार राज्य में भी की गई र्है, तो इस बीच क्षेत्र के सांसद, जो झाबुआ जिला आदिवासी बाहुल होकर बड़ी संख्या में यहां के ग्रामीण, जो आज अन्य राज्यों में परेषानी के बीच अपना जीवन यापन कर रहे है, उनके लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उन्हें झाबुआ में आने से रोकने के प्रयास कर रहे है।


कांतिलाल भूरिया कह रहे मेरे पास राज्यों में फंसे अनेकों ग्रामीणों के मद्द के लिए प्रतिदिन आ रहे फोन


पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं विधायक झाबुआ क्षेत्रीय विधायक कांतिलाल भूरिया ने वीडिया जारी कर बताया कि उनके पास पड़ौसी राज्यों गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र से लगातार वहां फंसे ग्रामीणों के फोन उनकी मद्द करने के लिए आ रहे है। फोन पर वह उनसे कह रह है कि वह झाबुआ जिले में अपने गांव या परिवार के पास आने चाहते है, लेकिन उन्हें झाबुआ जिले की सीमा से अंदर प्रवेष नहीं दिया जा रहा है। वह काफी परेषान हो रहे है। विधायक ने वीडियों में यहां तक कहा कि यदि मप्र सरकार इनके झाबुआ जिले की आने की व्यवस्था नहीं करती है, तो जिले के विधायक मिलकर यह व्यवस्था करेंगे। इस संबंध में 20 अप्रेल, सोमवार को विधायक श्री भूरिया ने भी मप्र के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अन्य राज्यों में फंसे झाबुआ जिले के आदिवासी मजदूरों की चिंता करते हुए उन्हें यहां सुरक्षित लाने की व्यवस्था करने की मांग की।


जयस ने सांसद के लिखे पत्र की निंदा की


जयस के प्रदेष प्रवक्ता अनिल कटारा ने इस मामले में अपना व्यक्तव्य जारी करते हुए कहा कि सांसद गुमानसिंह डामोर ने प्रदेष के मुख्यमंत्री को जो पत्र लिखा है, वह हमारे संज्ञान में भी आया है, जिसमें सांसद ने साफ तौर पर लिखा है कि जिले को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए ग्रामीणों को झाबुआ जिले की सीमा में आने से रोका जाए। प्रवक्ता श्री कटारा ने कहा कि सासंद पत्र में ऐसा लिखकर सीधे तौर पर आदिवासी समाज का अपमान कर रहे है, उनके इस पत्र की उन्होंने निंदा की है। साथ ही कहा कि इसके लिए सांसद आदिवासी समाज से मांगी मांगे।


फोटो 007 :- गुमानसिंह डामोर, क्षेत्रीय सांसद।


फोटो 008 :- कांतिलाल भूरिया, क्षेत्रीय विधायक।


फोटो 009 :- अनिल कटारा, प्रदेष प्रवक्ता, जयस।

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