Domain Registration ID: D414400000002908407-IN Editor - vinayak Ashok Jain (Luniya) 8109913008
Shobhit Jain August 9, 2019

शनिवार को सौभाग्य दशमी पर्व, महिलाएं रखेगी निर्जल उपवास, करेगी पूजन

जयपुर से शोभित जैन की रिपोर्ट।

दिगम्बर जैन मुनि विभंजन सागर महाराज ने कहा कि अगर देश का प्रत्येक नागरिक अपनी उपयोगिताओं का उपयोग कर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें तो विभिन्न प्रकार की छोटी-मोटी दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है और अन्य लोगो को भी बचाया जा सकता है। इस सृष्टि पर केवल एक उपयोगी प्राणी है तो वह इंसान है अगर इंसान अपनी उपयोगिता का प्रयोग करें और इंसानियत का धर्म निभाये तो विभिन्न घटनाओं और दुर्घटनाओं के दुष्परिणामों से बचा जा सकता है।

मुनि विभंजन सागर ने सभा के दौरान प्रवचन में कहा कि आज का प्राणी व्यर्थ की भाग-दौड़ कर रहा है, आज का प्राणी केवल मायाचारी, अहंकारी, लोभी और मतलबी होता जा रहा है। जिसके दुष्परिणाम दूसरों को तो भोगने पड़ते ही है साथ मे स्वयं को भी भोगने पड़ते है। अगर इस सृष्टि का प्रत्येक प्राणी अपनी जिम्मेदारियों को निर्वहन करते हुए यह संकल्प लेंवे कि वह कभी किसी लड़की को नहीं छेड़ेगा, पर कोई बदमाश किसी लड़की को छेड़ते हुए या बहन- बेटी के साथ अभद्र व्यवहार करता हुआ दिखेगा तो वह उसे नही छोड़ेगा, बहन-बेटियों, बहु की रक्षा -सुरक्षा करेगा। अगर देश की बहन, बहू और बेटियों को बचाने का संकल्प ले ले तो वह दिन दूर नहीं जब बलात्कार जैसी दुर्घटनाएं नहीं होगी। यह भारत का दुर्भाग्य है कि ऐसे अध्यात्मप्रिय देश में रोज बहन-बहु-बेटियों के साथ अत्याचार की घटनाएं पढ़ने और सुनने को मिलती है। देश को नासमझों से नुकसान कम और समझदारों के चुप रहने, आवाज ना उठाने और एक्टिवि ना करने के चलते अधिक हो रहा है। चरित्रवान लोग आगे आकर समूह बनाएं और चरित्रहीन लोगों को सबक सिखाएं, तभी देश की गिरती साख को बचाया जा सकेगा।

मुख्य प्रचार संयोजक अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि एशिया की सबसे बड़ी कॉलोनी वरुण पथ मानसरोवर के दिगम्बर जैन मंदिर में मुनि विश्वास सागर और मुनि विभंजन सागर के मंगल वर्षायोग चल रहा है। चतुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रातः 8.15 बजे से धर्मसभा का आयोजन होता है। जिसमे युगल मुनि श्री के सानिध्य में ज्ञान की गंगा का रसपान करने का सौभाग्य सभी श्रावकों को प्राप्त होता है। इसी के उपरांत शुक्रवार को प्रातः 8.15 बजे से मुनि श्री प्रवचन माला के दौरान सभा को संबोधित कर रहे थे।

इस दौरान मुनि विश्वास सागर महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि यह सृष्टि संत और समाज से बनी है, इसी तरह संस्कार है जो गुरु और शिष्य से बने है। इस सृष्टि के प्रत्येक मां-बाप, साधु-संत गुरु है जिनके व्यवहार से ही संस्कारों का आदान प्रदान होता है। जो अपने बच्चे, श्रावक (शिष्य है) को जैसी भाषा सिखाएंगे वो वही सीखते है। अगर बच्चा गलती करे तो माँ-बाप और गुरु को कभी उस गलती पर पर्दा नही डालना चाहिए, बल्कि बच्चे को उसकी गलती का एहसास करवाना चाहिए, उसे उस गलती के परिणाम बताने चाहिए। गलती किसी से भी हो सकती है लेकिन उस गलती का एहसास करवाने वाला भी होना चाहिए। तभी उन गलतियों को सुधारा जा सकता है और संस्कारों को डवलप किया जा सकता है। जैसे अगर कोई किसी के साथ अत्याचार करे तो चुप-चाप देखने के बजाय पीड़ित की मदद करनी चाहिए और अत्याचारी को उसकी गलती का एहसास करवाना चाहिए। जैसे सड़क पर गाड़ी चलाने के लिए अलग – अलग नियम है, कानून है। उसी तरह जिंदगी को बेहतर जीने के भी नियम और कानून है। जो प्राणी संस्कारों के साथ रहता है, अपने जीवन की उपयोगिता को समझता है और दूसरों की मदद करता है उसकी जिंदगी सदैव बेहतर रहेगी और अगर कोई प्राणी मायाचार, लोभ, क्रोध, अहंकार को बढ़ावा देता है तो उसे वेसे ही परिणाम अवश्य भोगने होते है, साथ अगर कोई अत्याचारों को देखकर उस पीड़ित की मदद नही करते है तो जरूरत पड़ने पर कोई उनकी भी मदद नही करते है। इसलिए जीवन की उपयोगिता को समझे और दुर्घटनाओं से बचे और बचाये, अगर स्वयं जिम्मेदारी का संकल्प लेकर दूसरों की मदद करेंगे तो घटनाएं और दुर्घटनाएं अपने आप नष्ट हो जाएगी।

अध्यक्ष एमपी जैन ने बताया कि शनिवार को शहरभर के जैन मंदिरों में सुगंध दशमी (सुहाग दशमी) पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। वरुण पथ मन्दिर में भी महिलाएं निर्जल उपवास रखेगी, इस दिन महिलाएं अपने सुहाग, सुख-शांति और समृद्धि व संतान प्राप्ति और संतान के बेहतर भविष्य की कामना करती है जिनेन्द्र अर्चना करते हुए पूरे दिनभर का उपवास रखती है। सुबह 6 बजे से ही मंदिरों में महिलाएं एकजुट होना प्रारम्भ कर देंगी और छोटे-छोटे समूह में एकजुट होकर पूजन आराधना करते है साथ ही सुगन्ध दशमी की कथा का भी गुणगान करती है।

SD TV (JAIN TV)

SD TV (MOVIE & ENTERTAINMENT)

Leave a comment.

Your email address will not be published. Required fields are marked*