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बिहार निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव को लेकर जिला अधिकारियों को खास निर्देश दिया है.


कोरोना के चलते टाल दिए जाएंगे पंचायत चुनाव? (सांकेतिक फोटो)

बता दें कि योगी सरकार (Yogi Government) ने 24 दिसम्बर 2020 को एक शासनादेश जारी करके चुनाव 6 महीने के लिए टाल दिये थे.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में कोरोना के संक्रमण (Corona Infection) के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है. अब तो संक्रमित होने वालों की संख्या 8 हजार के पार हो गयी है. ऐसे में सोशल मीडिया में जमकर इस बात की मांग उठाई जा रही है कि कोरोना को रोकने के लिए पंचायत चुनाव (Panchayat Election) टाल दिए जाएंगे. वरिष्ठ पत्रकार ऋषि मिश्रा ने ट्विटर पर लिखा कि “पंचायत चुनाव स्थगित हो सकते हैं. #sixthsense.” इसी तरह वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह ने भी ट्विटर पर लिखा कि “कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच यूपी में पंचायत चुनाव ज़रूरी हैं क्या?” साथ ही उन्होंने ये भी तंज किया है कि “जब दुनिया कोरोना से लड़ रही थी, तब हम चुनाव लड़ रहे थे. कुछ साल बाद कोरोना काल को हम इस तरह याद करेंगे. #PanchayatElections2021” बड़ी संख्या में लोगों ने इसपर अपनी प्रतिक्रियायें भी दी हैं.कुछ ने समर्थन किया है तो कुछ ने कहा है कि चुनाव के बिना गांवों में विकास कार्य रूके हैं. ऐसे में चुनाव होने चाहिए. एक दूसरे वरिष्ठ पत्रकार सूर्य प्रकाश शुक्ला ने लिखा है कि चुनावों पर तत्काल रोक लगनी चाहिए. इस तरह की बहस, जिज्ञासा और आशंका लगातार कई दिनों से चल रही है. न्यूज़ 18 ने पंचायती राज विभाग के अफसरों से इस मसले पर बात की कि क्या पंचायत चुनाव फिलहाल स्थगित किये जा सकते हैं ? जवाब में पंचायती राज में उप निदेशक और चुनाव के नोडल अफसर आरएस चौधरी ने चुनाव स्थगित करने की किसी मंशा को सिरे से खारिज कर दिया.

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उन्होंने कहा कि एक्ट में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं जिससे चुनाव को 6 महीने से ज्यादा टाला जा सके. अब चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गयी है और इसे टाला नहीं जा सकता. बता दें कि संयुक्त प्रांत पंचायती राज एक्ट 1947 में चुनाव को सिर्फ एक बार 6 महीने के लिए टालने का प्रबंध है. एक्ट की धारा 12 की उपधारा (3-क) में इस बात की व्यवस्था की गयी है कि यदि किन्हीं विषम परिस्थितियों के चलते चुनाव को टालना पड़े तो सरकार चुनाव को सिर्फ 6 महीने के लिए आगे बढ़ा सकती है.योगी सरकार के पास नहीं बचा कोई रास्ता
बता दें कि योगी सरकार ने 24 दिसम्बर 2020 को एक शासनादेश जारी करके चुनाव 6 महीने के लिए टाल दिये थे. तब कोरोना को ही कारण बताया गया था. जो चुनाव अभी हो रहे हैं उसे दिसंबर तक पूरा हो जाना चाहिए था. 25 दिसंबर 2020 को ही पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म हो चुका है और सरकार ने 6 महीने के लिए प्रशासक नियुक्त किया हुआ है. अब एक्ट के मुताबिक चुनाव टालने का एक बार का मिलने वाला मौका सरकार ले चुकी है. ऐसे में अब उसके पास चुनाव को और आगे टालने का कोई रास्ता नहीं है.अध्यादेश पर राज्यपाल से लेनी होगी मंजूरी
लेकिन, सरकार के पास अभी भी एक ब्रह्मास्त्र है जिसके प्रयोग से सारे नियम-कानून बौने हो जाएंगे. ऑर्डिनेन्स या अध्यादेश. इस पावर के जरिये सरकार राज्य से जुड़े किसी भी कानून में चेंज कर सकती है. अभी लागू पंचायती राज एक्ट के अनुसार चुनाव 6 महीने से ज्यादा नहीं टाले जा सकते. यदि सरकार एक्ट में ही संशोधन कर दे तो रास्ता निकल सकता है. एक्ट में संशोधन करने के लिए सरकार को अध्यादेश लाना पड़ेगा. अध्यादेश पर राज्यपाल की मंजूरी के साथ ही पंचायत चुनाव टल जाएंगे. जब विधानसभा का सत्र होगा तब सरकार इस संशोधन को दोनों सदनों से पास कराकर परमानेंट करा लेगी.

कोरोना ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
गौरतलब है कि पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन हो चुका है. 15 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होना है. दूसरी तरफ कोरोना का संक्रमण हर रोज नई ऊंचाइयां छू रहा है. 8 अप्रैल को यूपी में कुल 8490 नये मामले सामने आये हैं. ये संख्या हर रोज तेजी से बढ़ ही रही है. प्रदेश के मेट्रो शहरों लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर में तो बेहद खतरनाक दर से संक्रमण फैल रहा है. इसे देखते हुए कई शहरों में रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू भी लगा दिया गया है.







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