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29 मिनट पहलेलेखक: एरियन कोहेन

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खानपान की आदतों में बदलाव न सिर्फ वजन में कमी लाता है, बल्कि दिमाग और शरीर को भी हल्का करता है, इससे आप अच्छा महसूस करते हैं।

  • सीमित समय तक खाना; कार्बोहाइड्रेट और कृत्रिम शकर वाली चीजों से दूरी रखकर पा सकते हैं लक्ष्य

खानपान की आदतों में बदलाव न सिर्फ वजन में कमी लाता है, बल्कि दिमाग और शरीर को भी हल्का करता है। इससे आप अच्छा महसूस करते हैं। हो सकता है कि आप ऐसे दुर्लभ व्यक्तियों में से हों, जो मौजूदा खानपान के साथ 100 फीसदी क्षमता से काम कर पा रहे हैं। यदि ऐसा नहीं है तो आपको अपनी खाने की प्लेट देखने की जरूरत है। यह आपकी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में काफी मददगार साबित हो सकता है।

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में मानद् प्रोफेसर मैरियन नेस्ले का कहना है कि हम सभी को मन-मस्तिष्क को खुश रखने के लिए कैलोरीज की जरूरत होती है, पर इतनी ज्यादा भी नहीं कि हम पस्त पड़ जाएं। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ इसे लेकर पिछले एक दशक से 1.34 लाख करोड़ रुपए खर्च कर शोध कर रहा है कि लोगों पर डाइट किस तरह असर डालती है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक हमें पता होना चाहिए कि खानपान हमें सुस्त तो नहीं बना रहा। इसका उद्देश्य यह कि शरीर को पोषक तत्व मिलते रहें और प्रोसेस्ड खाने को कम किया जाए। इससे मेटोबॉलिज्म तो प्रभावित होता ही है। शरीर को पोषण भी नहीं मिल पाता। खानपान के ये तीन तरीके बहुत हद तक लक्ष्य को पाने में मदद कर सकते हैं।

कुछ देर ही खाना: रोज 4 से 8 घंटे के अंतर से खाना। ( कैलोरी मुक्त पेय ले सकते हैं)

प्रोडक्टिविटी: उच्च स्तर की सतर्कता, भूखे रहने पर आपका शरीर खाने के लिए अलग तरह से सक्रिय रहता है। अलर्टनेस बढ़ती है। कुछ लोगों में इससे शुगर की कमी हो सकती है। कंपन या एंग्जायटी महसूस हो सकती है। इसके लिए वे डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं।

कीटो डाइट: इस खानपान में ज्यादातर फैट, कुछ मात्रा में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट्स रहते हैं। यह खाना शरीर को किटोसिस अवस्था में ले जाता है। उसमें शरीर अपने प्राथमिक स्रोत के रूप में फैट बर्न करता है।

प्रोडक्टिविटी: यूसीएलए सेंटर फॉर ह्यूमन न्यूट्रिशन की डायरेक्टर झाउपिंग ली के मुताबिक इस स्थिति में शरीर खुद को एडजस्ट करता है, इससे कुछ लोग एनर्जेटिक और फोकस्ड महसूस करते हैं।

नो एडेड शुगर: ऐसे आहार न लेना जिनमें अलग से शकर मिलाई गई हो।

प्रोडक्टिविटी: शुगर शरीर में पहुंचते ही इंसुलिन रिलीज को उत्प्रेरित करती है। लीवर इस अतिरिक्त शकर को बदलने में जुट जाता है। कुल मिलाकर शरीर को बहुत काम करना पड़ता है। इसलिए मस्तिष्क अलर्ट हो जाता है। नेस्ले के मुताबिक शरीर आपको बेहतर तरीके से संकेत देता है कि आपके लिए कौन सा खानपान सही है।

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