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लॉकडाउन

अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 08 Apr 2021 11:39 PM IST

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कोरोना से लड़ाई में सबसे कारगर हथियार क्या हो सकता है, इस पर अभी भी बहस जारी है। अभी तक इसका कोई सर्वमान्य तरीका नहीं मिला है। पहली कोरोना लहर के वक्त संक्रमण फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में एक साथ लॉकडाउन का निर्णय लिया था। केंद्र के इस फैसले की कड़ी आलोचना भी हुई थी, क्योंकि इस फैसले के कारण भारी संख्या में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। हजारों किलोमीटर पैदल चलना पड़ा, लोगों के काम-धंधे चौपट हो गए तो करोड़ों लोगों को रोजी-रोटी से हाथ धोना पड़ा।दिलशाद गॉर्डन बना पहला कंटेनमेंट जोन
तब दिल्ली में जब दिलशाद गार्डन की एक महिला को कोरोना होने का पहला मामला सामने आया था, दिल्ली सरकार ने तत्काल इस एरिया को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया था। क्षेत्र में लोगों की आवाजाही पर रोक लगाकर दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने कोरोना संक्रमण रोकने का रास्ता अपनाया। बाद में भी दिल्ली ने इसी रास्ते को अपना मूलमंत्र बनाया और दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाकर कोरोना को रोकने में सफलता पाई।

गुरुवार को अनेक राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री ने बैठक की और देश में कोरोना के हालात पर चर्चा की। चर्चा के बाद उन्होंने नाईट कर्फ्यू को कोरोना संक्रमण के प्रति जागरूकता फैलाने में असरदार बताया और पूरे देश में एक साथ लॉकडाउन लगाने की संभावना को नकार दिया।प्रधानमंत्री ने कोरोना से लड़ाई में अरविंद केजरीवाल मॉडल को अपनाया और कहा कि कोरोना को रोकने में माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाने का रास्ता ज्यादा कारगर है और इस तरह छोटे-छोटे क्षेत्रों में आवाजाही पर प्रतिबंध लगाकर कोरोना को फैलने से रोका जा सकता है। इस प्रकार एक तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना की लड़ाई में अरविंद केजरीवाल का दिल्ली मॉडल अपनाया और उसे सभी राज्यों को अपनाने की सलाह भी दे दी।

क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना से लड़ाई के लिए केजरीवाल का दिल्ली मॉडल अपनाया है? अमर उजाला के इस सवाल पर भाजपा के एक राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि लॉकडाउन के कारण कई लोगों को असुविधा हुई थी, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन लॉकडाउन के फैसले को पूरी तरह से गलत भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि दुनिया के अनेक देश आज भी अपने यहां लॉकडाउन लगाकर ही कोरोना को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

नेता के मुताबिक, देश आर्थिक मोर्चे पर कड़ा संघर्ष कर रहा है। जीएसटी के रिकॉर्ड तोड़संग्रह के बाद भी अनेक मोर्चों पर खर्च करने के लिए सरकार के पास पर्याप्त मात्र में धन उपलब्ध नहीं है और इसे अन्य उपायों से इकट्ठा करने की कोशिश की जा रही है। इस दृष्टि में सरकार का लॉक डाउन न लगाने का फैसला सही कहा जा सकता है क्योंकि अगर दुबारा लॉक डाउन लगाने का फैसला लिया जाता है तो देश इससे बेहद गंभीर आर्थिक संकट में फंस सकता है।

कोरोना के मोर्चे पर ही नहीं, भाजपा ने पश्चिम बंगाल की जंग जीतने के लिए भी केजरीवाल के फार्मूले को अपनाया है। भाजपा ने दिल्ली में केजरीवाल की मुफ्त की योजनाओं पर सवाल जरूर उठाए थे, लेकिन जब पश्चिम बंगाल की बारी आई तो पार्टी ने यहां अपने चुनावी संकल्प पत्र में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा का वायदा किया है।

चूंकि भाजपा ने अपने किसी अन्य राज्य में इस तरह का कोई मॉडल पहले कभी पेश नहीं किया है, माना जा रहा है कि भाजपा ने यह आइडिया भी अरविंद केजरीवाल सरकार से ही ‘चुराया’ है, जो पहले ही अपने यहां महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा सहित कई मुफ्त योजनाओं के तोहफे देकर अपना किला अजेय कर चुके हैं।

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कोरोना से लड़ाई में सबसे कारगर हथियार क्या हो सकता है, इस पर अभी भी बहस जारी है। अभी तक इसका कोई सर्वमान्य तरीका नहीं मिला है। पहली कोरोना लहर के वक्त संक्रमण फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में एक साथ लॉकडाउन का निर्णय लिया था। केंद्र के इस फैसले की कड़ी आलोचना भी हुई थी, क्योंकि इस फैसले के कारण भारी संख्या में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। हजारों किलोमीटर पैदल चलना पड़ा, लोगों के काम-धंधे चौपट हो गए तो करोड़ों लोगों को रोजी-रोटी से हाथ धोना पड़ा।

दिलशाद गॉर्डन बना पहला कंटेनमेंट जोन

तब दिल्ली में जब दिलशाद गार्डन की एक महिला को कोरोना होने का पहला मामला सामने आया था, दिल्ली सरकार ने तत्काल इस एरिया को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया था। क्षेत्र में लोगों की आवाजाही पर रोक लगाकर दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने कोरोना संक्रमण रोकने का रास्ता अपनाया। बाद में भी दिल्ली ने इसी रास्ते को अपना मूलमंत्र बनाया और दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाकर कोरोना को रोकने में सफलता पाई।


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