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छोटी काशी के लोगों ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अब वर्तमान और भविष्य जयराम ठाकुर ही है.


छोटी काशी के लोगों ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अब वर्तमान और भविष्य जयराम ठाकुर ही है.

Politics of Mandi: मौजूदा परिस्थिति को देखकर सुखराम परिवार का राजनैतिक भविष्य संकट में नजर आ रहा है. हालांकि भविष्य में परिस्थितियां बदलने में देर नहीं लगती, लेकिन मौजूदा समय में हालात ठीक नहीं हैं.

मंडी. राजनीति में अपना एक रसूख रखने वाले पंडित सुखराम (Pandit Sukhram) परिवार को उसी के घर में मात देकर छोटी काशी की जनता से जयराम के साथ चलने का साफ संदेश दे दिया है. हिमाचल के मंडी (Mandi) जिले में नगर निगम के चुनावों में सुखराम (Sukhram) परिवार के लिए जिस तरह के चुनावी (Elections) नतीजे आए हैं, उससे छोटी काशी के लोगों ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अब वर्तमान और भविष्य जयराम ठाकुर ही है.नगर निगम की 15 सीटों में से भाजपा ने 11 पर प्रचंड जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस मात्र 4 सीटों पर ही सिमट कर रह गई. जो चार सीटें कांग्रेस ने जीती. वहां पर न तो सुखराम परिवार का कोई प्रभाव था और न ही जनाधार. सुखराम परिवार के प्रभाव वाली पुरानी मंडी, सुहड़ा और समखेतर सीट पर भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की.

पंडित सुखराम अपने बेटे अनिल शर्मा और पोते आश्रय शर्मा के साथ.

अनिल शर्मा के घर में हारेसमखेतर वार्ड में ही सुखराम परिवार का वोट भी है. यहीं पर इनका पुराना घर है और वर्षों तक यह परिवार इसी वार्ड में रहा भी है. कुछ समय पहले ही यह परिवार बाड़ी स्थित नए घर में शिफ्ट हुआ है. ऐसे में समखेतर वार्ड के लोगों ने परिवार विशेष का साथ छोड़ते हुए सीएम जयराम ठाकुर के प्रति अपना विश्वास जताया और चुपचाप भाजपा के साथ चलने का निर्णय ले लिया. वहीं, पुरानी मंडी और सुहड़ा में भी कांग्रेस की जबरदस्त हार हुई है. यहां पर भी भाजपा प्रत्याशियों ने प्रचंड जीत हासिल की है.

परिवार ने झोंकी थी ताकत
हालांकि, पंडित सुखराम के बेटे अनिल शर्मा और पौत्र आश्रय शर्मा ने जयराम ठाकुर पर व्यक्तिगत रूप से हमले करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. चुनावी बेला में ऐसा प्रतीत होने लग गया था कि जयराम ठाकुर के प्रति मंडी के लोगों की नाराजगी है. मतदाता खामोश था और खामोशी के साथ हर राजनैतिक ड्रामे को देख रहा था. लोगों ने चुप्पी साधे रखकर मतदान के माध्यम से ही संदेश देना बेहतर समझा. जब परिणाम आए तो यह साबित हो गया कि सुखराम परिवार का राजनैतिक रसूख समाप्त हो चुका है और जयराम ठाकुर ने इसपर कब्जा जमा लिया है. मौजूदा परिस्थिति को देखकर सुखराम परिवार का राजनैतिक भविष्य संकट में नजर आ रहा है. हालांकि भविष्य में परिस्थितियां बदलने में देर नहीं लगती, लेकिन मौजूदा समय में हालात ठीक नहीं हैं.







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