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Pariksha Pe Charcha 2021: प्रधानमंत्री ने 96 मिनट में विद्यार्थियों को दिए परीक्षाओं में सफलता के ये मंत्र

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Apr 7, 2021 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,
परीक्षा पे चर्चा 2021

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Wed, 07 Apr 2021 10:39 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब़ुधवार, 07 अप्रैल, 2021 को विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ परीक्षा पे चर्चा की। परीक्षा पे चर्चा 2021 के दौरान करीब 96 मिनट के संवाद में पीएम मोदी ने विद्यार्थियों को सफलता के कई मंत्र बताए। प्रधानमंत्री ने सफलता के लिए IIAV मंत्र देते हुए कहा कि मेमोरी को शार्प करने के लिए आप इन्वॉल्व (Involve) , इंटरनलाइज (internalize), एसोसिएट (associate) और विजुअलाइज (visualize) के फॉर्मूले पर आप चल सकते हैं। 
जीवन में सफलता और विफलता के पैमाने अलग-अलग  

प्रधानमंत्री ने कहा कि आप जो पढ़ते हैं, वो आपके जीवन की सफलता, विफलता का पैमाना एकमात्र नहीं हो सकता। आप जो जीवन में करेंगे, वो आपकी सफलता और विफलता को तय करेंगे। आप लोगों के दबाव, समाज के दबाव और परिवार के दबाव से बाहर निकलिए।

सपनों को पूरा करने के लिए संकल्पबद्ध हों

प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए संकल्पबद्ध होने की बात कही है। अपने संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने अभिभावकों को भी नसीहत देते हुए कहा कि बच्चों पर अपने सपनों को थोपना नहीं चाहिए। पीएम मोदी ने छात्रों को कहा कि परीक्षाओं से डरने की जरूरत नहीं है। परीक्षा की सफलता ही जीवन का आखिरी पड़ाव नहीं होती है। जिंदगी में और भी बहुत कुछ है। जीवन में कई और परीक्षाएं भी होती हैं तो ऐसे में बोर्ड परीक्षाओं से डरना कैसा?

डर परीक्षाओं का नहीं, आसपास के माहौल का है 

आंध्र प्रदेश की छात्रा एम पल्लवी और एक अन्य छात्र अर्पण पांडे ने प्रधानमंत्री से परीक्षा का डर खत्म करने का उपाय पूछा था। इस सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा विद्यार्थियों को डर परीक्षाओं का नही होता है। उन्हें डर होता है उस माहौल से जो उनके आसपास बना दिया गया है कि यही एग्जाम सब कुछ है। यही जिंदगी है।

बकौल पीएम मोदी, आपको डर एग्जाम का नहीं है, आपको डर किसी और का है और वो क्या है? आपके आस-पास एक माहौल बना दिया गया है कि यही एग्जाम सब कुछ है, यही जिंदगी है। और हम आवश्यकता से अधिक ओवर कॉन्शियस हो जाते हैं। हम थोड़ा ज्यादा सोचने लग जाते हैं।



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