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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से मिला ग्राम प्रधान चुनने का अधिकार


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से मिला ग्राम प्रधान चुनने का अधिकार

Panchayat Elections in Vantangia Villages: योगी सरकार में राजस्व ग्राम घोषित होने के बाद गोरखपुर और महराजगंज के 23 वनटांगिया गांव पहली बार पंचायत चुनाव में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे.

गोरखपुर. आजादी के 70 वर्षों बाद वनटांगिया गांवों (Vantangia Villages) के लोग पहली बार पंचायत चुनाव (UP Panchayat Chunav 2021) में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए ग्राम प्रधान चुनेंगे और अपने गांव की सरकार बनाएंगे. साल 2017 से पहले वनटांगिया गांव राजस्व ग्राम के रूप में अभिलेखों में दर्ज नहीं थे. सरकार की योजनाओं का भी लाभ इन्हे नहीं मिल पा रहा था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम घोषित कर उन्हें आजाद देश में मिलने वाली सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा. राजस्व ग्राम घोषित होने के बाद गोरखपुर और महराजगंज के 23 वनटांगिया गांव पहली बार पंचायत चुनाव में सक्रिय भागीदारी निभाकर गांव की सरकार चुनने जा रहे हैं. इनमें गोरखपुर के पांच और महराजगंज के 18 वनटांगिया गांव हैं.पिछले चुनाव में इन्हें वोट डालने को भले मिला हो, लेकिन खुद का गांव राजस्व ग्राम न होने से गांव की सरकार से इनको कोई फायदा नहीं मिल पा रहा था. मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने साल 2017 में जब इन गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाया तो उसके बाद से इन्‍हें मूलभूत सुविधाएं भी मिलने लगीं. गांव में स्कूल बना तो राशन कार्ड से राशन मिलने लगा. बिजली, सड़क, पानी, आवास जैसी सुविधाएं इन लोगों को मिलने लगीं. साथ ही पात्रों को वृद्धा, विधवा, दिव्यांग पेंशन योजनाओं का लाभ भी मिलने लगा.

क्या हैं वनटांगिया गांव
वनटांगिया गांव अंग्रेजी शासन में 1918 के आसपास बसाए गए थे. मकसद साखू के पौधों का रोपण कर वनक्षेत्र को बढ़ावा देना था. इनके जीवन यापन का एकमात्र सहारा पेड़ों के बीच की खाली जमीन पर खेतीबाड़ी था. गोरखपुर में कुसम्ही जंगल के पांच इलाकों में फैले जंगल तिनकोनिया नम्बर तीन, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी और चिलबिलवा में बसी इनकी बस्तियां 100 साल से अधिक पुरानी हैं. साल 1998 में गोरखपुर से पहली बार सांसद बनने के बाद योगी आदित्यनाथ वनटांगियों के संघर्ष के साथी बने और अपने संसदीय कार्यकाल में सड़क से सदन तक उनके हक के लिए आवाज बुलंद करते रहे. वनटांगियों से योगी की आत्मीयता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह साल 2009 से उन्हीं के बीच दिवाली मनाते हैं. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी यह सिलसिला नहीं टूटा है.पीएम मोदी भी कर चुके हैं तारीफ
महराजगंज के वनटांगिया तो वास्तव में नजीर बनकर सामने आए हैं. वनटांगिया किसानों की एफपीओ ने सुनहरी शकरकंद की खेती और इसकी मार्केटिंग के लिए अहमदाबाद की एक कम्पनी से करार कर पूरे देश का ध्यान खींचा है. इस एफपीओ से जुड़े प्रमुख वनटांगिया किसान रामगुलाब की तारीफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं. प्रधानमंत्री ने रामगुलाब से पिछले साल 25 दिसम्बर को वर्चुअल संवाद भी किया था.







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