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न्यूयॉर्क13 मिनट पहलेलेखक: जेनी ग्रॉस/मारिया क्रेमर

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आमतौर पर तलाक के वक्त दंपतियों में विवाद रहता है कि बच्चों की कस्टडी किसके पास रहेगी। पर अमेरिकी दंपती उन ‘बच्चों’ पर हक जताने के लिए लड़ रहे हैं, जिनका जन्म ही नहीं हुआ है।

  • लॉकडाउन में बढ़े विवाद, दंपती लीगल एक्सपर्ट्स से सलाह लेकर दस्तावेज तैयार करवा रहे

आमतौर पर तलाक के वक्त दंपतियों में विवाद रहता है कि बच्चों की कस्टडी किसके पास रहेगी। पर अमेरिकी दंपती उन ‘बच्चों’ पर हक जताने के लिए लड़ रहे हैं, जिनका जन्म ही नहीं हुआ है। दरअसल अमेरिका में भ्रूण फ्रीज कराने का चलन है। अब अलग होने के वक्त दंपतियों में विवाद हो रहा है कि इन फ्रोजन भ्रूण पर किसका हक होगा। लॉकडाउन में आईवीएफ ट्रीटमेंट बढ़े तो बड़ी संख्या में इनसे जुड़े मामले भी लीगल एक्सपर्ट के पास पहुंचने लगे।

सार्वजनिक रूप से इस पर बहस तब शुरू हुई, जब कोर्ट ने अभिनेत्री सोफिया वेर्गारा के पूर्व मंगेतर निक लोएब के खिलाफ फैसला दिया। लोएब ने कोर्ट से भ्रूण की कस्टडी मांगी थी। ज्यादातर मामलों में दस्तावेजों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यदि एक पार्टनर की मौत हो जाए, वह मानसिक संतुलन खो दे या अलगाव होने पर फैसला कौन लेगा। सिलिकॉन वैली की चर्चित वकील मोनिका मेजेजी के मुताबिक तलाक के बाद यदि एक पार्टनर भ्रूण से बच्चे चाहता है, तो दूसरे को अजीब स्थिति में डाल देता है।

एनवाययू लेंगोन फर्टिलिटी सेंटर के डॉ. ब्रुक होड्स वर्ट्ज के मुताबिक कंपनियां बीमा प्लान में फर्टिलिटी ट्रीटमेंट शामिल कर रही हैं। इसलिए बड़ी संख्या में दंपती यह विकल्प चुन रहे हैं, पर यदि दंपती रिश्ते को लेकर निश्चित नहीं हैं तो उन्हें भ्रूण के साथ एग भी फ्रीज करना चाहिए। ऐसी स्थिति में उन्हें पार्टनर पर निर्भर नहीं रहना होगा। इन मामलों से गुजर चुके लोगों और एक्सपर्ट्स का कहना है कि दस्तावेजों में यह स्पष्ट होना चाहिए कि दोनों पार्टनर का हक बराबर होगा, अन्यथा भावनात्मक, आर्थिक चुनौतियां झेलनी पड़ेंगी।

30% बढ़े फर्टिलिटी ट्रीटमेंट
अमेरिका के सबसे व्यस्त न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी लेंगोन फर्टिलिटी सेंटर में पिछले साल जून से दिसंबर के बीच 2019 की तुलना में 30% नए मरीज बढ़ गए। सिएटल रिप्रोडक्टिव मेडिसिन सेंटर में भी इस दौरान 15% मरीज बढ़े। नॉक्सविले में स्थित सबसे बड़े एम्ब्रियो डोनेशन सेंटर 10 से 13 लाख एम्ब्रियो हैं। बीते दशक में इन डोनेशन की संख्या में 5 से 6 लाख की बढ़ोतरी हुई है।

अगर दस्तावेज में स्पष्ट रूप से नहीं लिखा तो कोर्ट से भी मदद नहीं मिलेगी
सैन फ्रांसिस्को की फिजिशियन और पियानिस्ट डॉ. मिमी ली बताती हैं कि उन्होंने कैंसर का इलाज शुरू कराने से पहले पति के साथ मिलकर 5 स्वस्थ भ्रूण फ्रीज किए थे। तीन साल बाद दोनों का तलाक हो गया। तब डॉ. ली ने चाहा कि उन भ्रूणों से बच्चों को जन्म दिया जाए। पर उनके पति ने केस करके उन्हें रोक दिया। जज ने कहा कि दंपती ने फर्टिलिटी क्लिनिक में दस्तावेजों पर साइन किए थे, उसके मुताबिक भ्रूण पर फैसला दोनों साझेदारों की सहमति से होगा।

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