Domain Regd. ID: D414400000 002908407-IN Editor - vinayak Ashok Jain (Luniya) 8109913008

Please Play for Watching SD News Live TV (News + Entertainment)

Ingenuity Mars Helicopter

वर्ल्ड डेस्क, अमर अजाला, वॉशिंगटन
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 06 Apr 2021 04:53 AM IST

ख़बर सुनें

मार्स मिशन के तहत नासा ने एक कदम और आगे बढ़ा दिया है। मंगल की सतह पर अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर लैंड (Ingenuity Helicopter ) करने के बाद मंगल पर अपनी पहली सर्द रात सफलतापूर्वक काट ली है। साथ ही यह दूसरे ग्रह की धरती पर उतरने वाला पहला रोटरक्राफ्ट बन गया है।नासा ने बताया कि इंजीन्यूटी मार्स हेलिकॉप्टर ने लाल ग्रह मंगल पर अपनी पहली सर्द रात काट ली है, जो नासा के लिए बड़ी सफलता है। मंगल ग्रह की रात बेहद सर्द भरी होती है। यहां के सतह का तापमान -130°F (-90°C) तक गिर सकता है।  इस हेलिकॉप्टर को मार्स पर्सिवियरेंस रोवर के पेट के नीचे कवर करके लाल ग्रह पर भेजा गया था। यह कंगारुओं के बच्चों की तरह रोवर के पेट में छिपा था।

 

लाल ग्रह की सर्द रातें हैं चुनौती
यह आगे चलकर सौर ऊर्जा से भी चार्ज होगा जो मंगल पर धरती की तुलना में कम है, लेकिन इसमें हाई-टेक सोलर पैनल लगे हैं जो यह काम आसान कर देंगे। हालांकि, बाद में इसका तापमान कम रखा जाएगा ताकि बैटरी ज्यादा खर्च न हो।

हेलिकॉप्टर की हर कदम पर वैज्ञानिकों की पैनी नजर 
टीम न सिर्फ ये देखेगी कि हेलिकॉप्टर कैसा चल रहा है, बल्कि इसके सोलर पैनल, बैटरी की हालत और चार्ज भी चेक करेगी। अगले कुछ दिन तक इन पैमानों को टेस्ट किया जाएगा। इस स्टेप के पूरा होने के बाद इसके रोटर ब्लेड्स को अनलॉक किया जाएगा और फिर इसके मोटर और सेंसर टेस्ट किए जाएंगे। मंगल के 30 दिन (धरती के 31 दिन) बाद इसकी एक्सपेरिमेंटल फ्लाइट की कोशिश होगी।

मार्स मिशन के तहत नासा ने एक कदम और आगे बढ़ा दिया है। मंगल की सतह पर अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर लैंड (Ingenuity Helicopter ) करने के बाद मंगल पर अपनी पहली सर्द रात सफलतापूर्वक काट ली है। साथ ही यह दूसरे ग्रह की धरती पर उतरने वाला पहला रोटरक्राफ्ट बन गया है।

नासा ने बताया कि इंजीन्यूटी मार्स हेलिकॉप्टर ने लाल ग्रह मंगल पर अपनी पहली सर्द रात काट ली है, जो नासा के लिए बड़ी सफलता है। मंगल ग्रह की रात बेहद सर्द भरी होती है। यहां के सतह का तापमान -130°F (-90°C) तक गिर सकता है।  इस हेलिकॉप्टर को मार्स पर्सिवियरेंस रोवर के पेट के नीचे कवर करके लाल ग्रह पर भेजा गया था। यह कंगारुओं के बच्चों की तरह रोवर के पेट में छिपा था।

लाल ग्रह की सर्द रातें हैं चुनौती

यह आगे चलकर सौर ऊर्जा से भी चार्ज होगा जो मंगल पर धरती की तुलना में कम है, लेकिन इसमें हाई-टेक सोलर पैनल लगे हैं जो यह काम आसान कर देंगे। हालांकि, बाद में इसका तापमान कम रखा जाएगा ताकि बैटरी ज्यादा खर्च न हो।

हेलिकॉप्टर की हर कदम पर वैज्ञानिकों की पैनी नजर 

टीम न सिर्फ ये देखेगी कि हेलिकॉप्टर कैसा चल रहा है, बल्कि इसके सोलर पैनल, बैटरी की हालत और चार्ज भी चेक करेगी। अगले कुछ दिन तक इन पैमानों को टेस्ट किया जाएगा। इस स्टेप के पूरा होने के बाद इसके रोटर ब्लेड्स को अनलॉक किया जाएगा और फिर इसके मोटर और सेंसर टेस्ट किए जाएंगे। मंगल के 30 दिन (धरती के 31 दिन) बाद इसकी एक्सपेरिमेंटल फ्लाइट की कोशिश होगी।




Source by [author_name]

Avatar

Leave a Reply