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कोरोना ओर लॉक डाउन में एक आदिवासी भील परिवार के सात भाई बहन अकेले कर रहे संघर्ष अपनी 10 वर्षीय बहन के भरोसे

धार जिला ब्यूरो चीफ स्वस्तिक जैन की रिपोर्ट

बाग। कोरोना जैसी भयंकर बीमारी और संपूर्ण लॉक डाउन के बीच ग्रामीण क्षेत्र से जो एक तस्वीर उभर कर सामने आई है वह भयावह ओर आश्चर्यचकित के साथ मन मस्तिष्क को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है।एक 10 वर्षीय बालिका इस वक्त अपने भाई बहनों को खाना बनाने से लेकर सम्भाल रही है उसके माता-पिता दोनों इनदिनों घर पर नही है और घर की माली हालत यह है कि पिता जेल में सजा काट रहा है तो माँ बच्चो को पालने के चक्कर मे गुजरात मजदूरी करने गई तो लॉक डाउन हो जाने के चलते वापस नही आ सकी और बच्चे बीते दो माह से अकेले घर पर रहकर मा-बाप के इंतजार में दिन काट रहे है और मोहल्ले वालों के भरोसे रह रहे है।

 बाग के समीप 3 किलोमीटर दूर ग्राम वाणदा के एक फालिये में एक परिवार में बिना मा ओर बाप के सात छोटे-छोटे बच्चे एक टूटी फूटी झोपड़ी में रहकर ओर उनमे से भी पांच दिव्यांग ओर बीमारियों से ग्रसित अपनी एक छोटी बहन के सहारे जीवन व्यापन कर समय बिता रहे है। इस वक्त इस परिवार में कोई कमाने वाला नही है बच्चे मोहल्ले वालों के भरोसे है हालांकि ग्राम पंचायत ने जरूर राशन सामग्री दी। इस परिवार के बच्चो में दिव्यांगता की बीमारी पांच वर्ष का होते-होते आने लगती है जो वर्तमान में दो और बहनों में भी दिखाई देने लगी है यह बात उनके काका ओर आसपास रहने वालों ने बताया।

समीप ग्रामीण ग्राम पंचायत वाणदा के गंदेडीया फल्या जहाँ सात से आठ भील परिवार रहते है उसी फालिये में जरावर सिह का परिवार रहता है परन्तु इस परिवार में इन दिनों सिर्फ सात छोटे-छोटे बच्चे ही अकेले रह रहे है इन बच्चो का बाप तो जेल में है और माँ संतरी बच्चो को घर पर छोड़कर बीते 2 माह पूर्व अपने मायके वालों के साथ गुजरात मजदूरी के लिए चली गई है वह भी इस समय लॉक डाउन के चलते भी यहाँ गांव में नही है और बच्चे अनाथ ओर लावारिस हालत में अपना समय जैसे तैसे बिता रहे है हालांकि यह स्थिति इनके साथ बीते दो माह से बनी हुई है।

नो भाई बहन है कुल यहाँ सात एक साथ रहते है उनमें भी 5 दिव्यांग है जो काम नही कर सकते

 जरावर ओर संतरी बाई के कुल नो पुत्र-पुत्रियां है इनमें से दो को वह अपने साथ गुजरात ले गई है जबकि सात जिनमे से पांच दिव्यांग है को यही गांव में छोड़ गई है। इन भाई बहनों में   यहाँ सबसे बड़ा 15 वर्ष का अनिल,धर्मेंद्र 14 वर्ष,पातल 13 वर्ष,सगीता 12 वर्ष,वेसलू ,ऋतु ओर सबसे छोटी पूजा है इन सबका खाना ओर ध्यान रखने का काम 10 वर्षीय संगीता कर रही है।दोनों भाई अनिल पूरी तरह हाथ पैर काम नही कर पा रहे है ओर धर्मेंद् कोई काम नही कर सकता वहिं बहन पातल भी दिव्यांग है ओर दो अन्य में अभी वैसी ही बीमारी के संकेत मिलना शुरू हो गए है तो एक तो अभी बिल्कुल ना समझ है।इन बच्चो को सरकारी शिविरों में भी दिखाया गया परन्तु इनकी बीमारी की जड़ का कोई पता नही अबतक चला है यह कहना है इस ग्राम पंचायत के सचिव केशरसिंह डुडवे बताते है।

नन्ही सी संगीता ही बनातीं है खाना और रखती है घर का ध्यान

इन सात भाई बहनों में 10 वर्षीय एक संगीता ही है जो इसवक्त इन सभी भाई- बहनों की माँ- बाप ओर सब कुछ है छोटी सी संगीता ही सुबह- शाम चूल्हे पर इन सबके लिए खाना पकाती है ओर खिलाती भी है संगीता कुछ बोल नही पाई जब उससे चर्चा की तो बस इतना ही बोली कि माँ नही है और इनका ध्यान रखती हूं खाना भी में ही बनती हु।

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