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बंगालः रिकाउंटिंग पर रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला ही अंतिम, नंदीग्राम पर EC ने तोड़ी चुप्पी


नंदीग्राम में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग से दोबारा मतगणना की मांग की थी. फाइल फोटो

Nandigram Election Result 2021: नंदीग्राम विधानसभा सीट पर टीएमसी उम्मीदवार ममता बनर्जी और बीजेपी उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली थी. अधिकारी ने टीएमसी नेता को 1956 वोटों से हरा दिया.

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट (Nandigram Election Result 2021) पर दोबारा मतगणना (Recounting) की मांग के संदर्भ में मीडिया में छप रही खबरों का संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने मंगलवार को कहा कि नियमों के मुताबिक रिकाउंटिंग के मामले में आयोग के द्वारा नियुक्त रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला ही आखिरी होता है. आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “चाहे नामांकन की बात हो, मतदान हो या फिर मतगणना, रिटर्निंग ऑफिसर चुनावी नियमों के मुताबिक आयोग के नियमों और गाइडलाइंस को कड़ाई से लागू करने के लिए काम करता है.” बता दें कि नंदीग्राम विधानसभा सीट पर टीएमसी उम्मीदवार ममता बनर्जी और बीजेपी उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली थी. ममता के पूर्व सहयोगी शुवेन्दु अधिकारी ने टीएमसी नेता को 1956 वोटों से हरा दिया. रविवार को मतगणना के बाद शुवेन्दु अधिकारी को विजेता घोषित करने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग से तुरंत दोबारा मतगणना की मांग की थी. नंदीग्राम के फैसले पर ममता बनर्जी ने कहा था कि उनकी पार्टी चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ कोर्ट जाएगी. उन्होंने आरोप लगाया कि नंदीग्राम का मतदान अधिकारी दबाव में था, इसलिए उसने रिकाउंटिंग की मांग को खारिज कर दिया. ममता ने अपनी दलीलों के संबंध में अपने मोबाइल फोन में एक मैसेज भी दिखाया. उन्होंने कहा, “मैं नहीं बता सकती कि मेरे पास किसने मैसेज भेजा, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने इस मैसेज को लिखा है और कहा है कि उसकी जान खतरे में है.” ममता ने कहा कि पोलिंग ऑफिसर को गन प्वाइंट पर लेकर रिकाउंटिंग के लिए मना करने को कहा गया. चुनाव आयोग ने कहा, “एक विधानसभा क्षेत्र का रिटर्निंग ऑफिसर पीपुल्स प्रतिनिधि एक्ट, 1951 के तहत अपनी जिम्मेदारियों को निभाता है. चाहे नामांकन की बात हो, मतदान हो या फिर मतगणना, रिटर्निंग ऑफिसर कानून के मुताबिक चुनाव आयोग के नियमों और गाइडलाइंस को कड़ाई से लागू करने के लिए काम करता है.आयोग ने आगे कहा कि जब दोबारा मतगणना के लिए आवेदन दिया जाता है, तो रिटर्निंग ऑफिसर को फैसला लेना होता है. इस स्थिति में ऑफिसर आवेदन को पूर्ण रूप से स्वीकार कर सकता है या आंशिक रूप से, या फिर आवेदन को पूर्ण रूप से खारिज कर सकता है, अगर उसे दोबारा मतदान के लिए दिए गए आवेदन में गिनाए गए कारण उपयुक्त नहीं लगते हैं.

चुनाव आयोग ने कहा, “नंदीग्राम में काउंटिंग के बाद एक उम्मीदवार के चुनाव एजेंट ने रिकाउंटिंग की मांग की, जिसे रिटर्निंग ऑफिसर ने उपलब्ध सबूतों के आधार पर नियम 63 के तहत मौखिक आदेश के जरिए खारिज कर दिया. और रिजल्ट जारी कर दिया गया. इस तरह के मामलों में सिर्फ कानूनी विकल्प बचता है कि हाईकोर्ट में इलेक्शन पिटीशन दाखिल की जाए.”







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