30 से 35 रूपए तक हो सकता हैं 1 जीबी मोबाइल डेटा, कॉल पर भी 6 पैसा मिनिट लग सकता हैं चार्ज, जानिए आखिर क्यों

एजीआर की मार झेल रही देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों ने सरकार से डेटा की कीमतें बढ़ाने की मांग की है। वोडाफोन आईडिया, एयरटेल के आलाव रिलायंस जिओ तक ने यह मांग की है कि यूजर को जिए जा रहे डेटा की कीमतों में बढ़ोतरी की जाए। अगर ऐसा होता है तो मान के चलिए की आपके मोबाइल रिचार्ज का खर्च थोड़ा नहीं बल्कि 10 गुना तक बढ़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह कंपनियों की तरफ से की गई मांग है और सरकार ने इसे लेकर कोई फैसला नहीं किया है। लेकिन ताजा हालातों को देखकर लगता है कि टेलीकॉम कंपनियां अपनी इस मांग से पीछे हटने वाली नहीं हैं।

किसने की है कितना पैसा बढ़ाने की मांग
वोडाफोन आईडिया ने डेटा टैरिफ में 7-8 गुना तक बढ़ोतरी की मांग की है। फिलहाल यूजर्स को यह डेटा 4-5 रुपए प्रति जीबी की दर से मिल रहा है। इसका मतलब है कि कंपनी ने इसे सीधे दोगुना करने की मांग की है। कंपनी का कहना है कि दरें बढ़ाकर ही वह बकाया चुकाने और कारोबार को चलाए रखने में सक्षम हो पाएगी। अधिकारी ने कहा, “वोडाफोन आइडिया ने कंपनी चलाते रहने के लिए सरकार से कई मांगें की हैं। कंपनी चाहती है कि डाटा की कीमत कम से कम 35 रुपए प्रति जीबी तय की जाए। कंपनी ने पहली अप्रैल से मंथली कनेक्शन चार्ज भी 50 रुपए करने की मांग की है। आउटगोइंग कॉल के मामले में कंपनी चाहती है कि कम से छह पैसा प्रति मिनट का टैरिफ तय किया जाए।”

वहीं एयरटेल ने कहा है कि इंटरनेट डेटा की इस फीस को 30 रुफए प्रति जीबी कर दिया जाए। इसी तरह रिलायंस जिओ ने भी देश में इंटरनेट डेटा की कीमत 20 रुपए प्रति जीबी तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। कंपनी ने कहा है कि डेटा की मिनिमम कीमत 15 रुपए प्रति जीबी की जाए और अगले 6 से 9 मीहनों में बढ़ाकर 20 रुपए प्रति जीबी की जाए। हालांकि, उसने कॉल चार्जेस 6 पैसे प्रति मिनट करने के प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया है।
बता दें कि नीती आयोग ने टेलीकॉम कंपनियों के इस प्रस्ताव का विरोध किया है वहीं इसके चीफ एग्जीक्यूटिव अमिताभ कांत ने इसका समर्थन करते हुए मिनिमम फ्लोर प्लान के समर्थन में खत भी लिखा है। उन्होंने कहा है कि यह वक्त की जरूरत है हालांकि, इससे लंबे समय में समाधान नहीं होगा।
अब अगर सरकार इनके प्रस्ताव को मान लेती है तो आपकी जेब पर पड़ने वाला खर्च 10 गुना तक बढ़ जाएगा। हालांकि, अगर सरकार इस प्रस्ताव को मानती भी है तो इस बात की संभावना कम है कि वो डेटा प्राइज इतना ज्यादा बढ़ाने को मंजूरी देगी क्योंकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके बाद देश में मोबाइल और इंटरनेट डेटा यूजर्स की संख्या अचानक कम हो जाएगी।

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