Domain Registration ID: D414400000002908407-IN Editor - vinayak Ashok Jain (Luniya) 8109913008 fr-filmstreaming.com filmstreaming
admin March 11, 2020

नई दिल्‍ली। मध्‍य प्रदेश के रास्‍ते देश की सियासत में आए भूचाल में जो सबसे बड़ा किरदार बनकर सामने आया है उसका नाम ज्योतिरादित्य सिंधिया है। इस सियासी दांवपेंच में उन्‍होंने जिसको पटखनी दी है वो कमलनाथ हैं। इस सियासी दंगल में कमलनाथ ने राजनीति में अपने से आधे अनुभवी के हाथों जिस तरह से मात खाई है वो अपने आप में काफी दिलचस्‍प है।

कमलनाथ दमदार सियासी सफर

दोनों के राजनीतिक करियर को यदि देखें तो कमलनाथ का राजनीतिक करियर 1980 में शुरू हुआ था। उन्‍होंने अपने दम पर राजनीति में एक ऊंचा मुकाम पाया। इसके अलावा कमलनाथ कांग्रेस के उन दिग्‍गज नेताओं में से हैं जिन्‍होंने कभी कोई चुनाव नहीं हारा। 1980 से लगातार 2014 तक कमलनाथ ने चुनावी दंगल मे बड़े-बड़ों को सीधी टक्‍कर देकर हराया है। राजनीति में कमलनाथ गांधी परिवार के काफी करीबी माने जाते हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया को विरासत में मिली सियासत

वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया की बात करें तो उन्‍हें राजनीति विरासत में मिली। अपने पिता और कांग्रेस के नेता माधवराज सिंधिया की आकस्मिक मौत के बाद उन्‍होंने गूना से भाजपा को देशराज सिंह यादव को करीब 4.5 लाख मतों से शिकस्‍त दी थी। सिंधिया उस परिवार से आते हैं जो ग्‍वालियर का बड़ा राजघराना है और राजनीति जिसकी परंपरा रही है।

सियासी अनुभव

सिंधिया और कमलनाथ के राजनीतिक करियर में भी दोगुने का अंतर है। ज्योतिरादित्य का राजनीतिक करियर जहां महज 18 साल का है वहीं कमलनाथ 40 वर्षों का है। कमलनाथ ने कई बार केंद्र में बड़ी जिम्‍मेदारी संभाली है वहीं सिंधिया की बात करें तो वो तीन बार केंद्र में मंत्री रहे हैं। ज्योतिरादित्य ने जहां महज 18 वर्षों के राजनीतिक करियर में कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा का साथ पाया है वहीं कमलनाथ बीते 40 वर्षों से कांग्रेस के साथ खड़े रहे हैं।

कमलनाथ ने दिलाई सत्‍ता

मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को अपने दम पर बनाने का पूरा श्रेय कमलनाथ को ही जाता है। यहां पर कांग्रेस वर्षों से सत्‍ता को तरस रही थी। लेकिन यहां पर कांग्रेस की जीत के साथ ही कमलनाथ और ज्योतिरादित्य के बीच सीएम की कुर्सी को लेकर मुटाव भी साफतौर पर दिखाई देने लगा था। हालांकि इसके बावजूद कांग्रेस हाईकमान ने यहां पर सीएम की कुर्सी कमलनाथ को सौंपी थी। इसकी वजह थी उनका लंबा राजनीतिक अनुभव। लेकिन मध्‍य प्रदेश में सरकार बनने के बाद से ही लगातार सरकार के सामने अपने ही चुनौतियां पेश कर रहे थे। इसमें सबसे बड़ा नाम ज्‍योतिरादित्‍य का था।

कमलनाथ सरकार पर संकट

फिलहाल ज्‍योतिरादित्‍य की वजह से राज्‍य सरकार पर संकट के बादल मंडराते दिखाई दे रहे हैं। यदि भाजपा ज्‍योतिरादित्‍य की बदौलत कमलनाथ सरकार को गिराने में सफल हुई भी तो भी वह उन्‍हें राज्‍य की बागडोर सौंपेगी इसकी संभावना काफी कम ही है। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्‍योंकि मीडिया रिपोर्टस कुछ इस तरह की हैं कि भाजपा उन्‍हें राज्‍यसभा भेज सकती है। हालांकि राज्‍‍‍य में अभी विधानसभा चुनाव काफी दूर हैं। ये भी फिलहाल भविष्‍‍‍य के गर्भ में छिपा है कि ज्‍योतिरादित्‍य को भाजपा का खेमा कितना भाता है। 2019 केचुनाव में उन्‍होंने गूना से भाजपा के प्रत्‍याशी के ही हाथों मात खाई है।

कुछ समानताएं

इन दोनों में एक और बड़ी दिलचस्‍प बात है। ये दोनों ही दून स्‍कूल देहरादून से पढ़े हैं। दून स्‍कूल में पढ़ाई के दौरान कमलनाथ की संजय गांधी से मुलाकात और दोस्‍ती हुई थी। कमलनाथ जहां कलकत्‍ता यूनिवर्सिटी से कॉमर्स ग्रेजुएट हैं वहीं ज्‍योतिरादित्‍य हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से इकनॉमिक्‍स में ग्रेजुएट हैं। वर्ष 2004-2009 के दौरान जब कमलनाथ केंद्र में कॉमर्स एंड इंडस्‍ट्री मिनिस्‍टर थे तब उनके जूनियर के तौर पर ज्‍योतिरादित्‍य इसी मंत्रालय को देख रहे थे। दोनों ही कांग्रेस में महासिचव तक रह चुके हैं।

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