Domain Regd. ID: D414400000 002908407-IN Editor - vinayak Ashok Jain (Luniya) 8109913008

Please Play for Watching SD News Live TV (News + Entertainment)

कोरोना की दूसरी लहर रोकनी है: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा- वैक्सीन पॉलिसी और लॉकडाउन पर विचार करें, अस्पताल मरीजों को इनकार न कर सकें


  • Hindi News
  • National
  • Coronavirus Lockdown Or Covid Vaccine Procurement Policy; Supreme Court To Narendra Modi Govt

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

नई दिल्ली6 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

कोरोना की दूसरी लहर रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को वैक्सीन पॉलिसी पर दोबारा विचार के लिए कहा है। केंद्र अभी खुद 50% वैक्सीन खरीदता है, बाकी 50% वैक्सीन को निर्माता कंपनी सीधे राज्यों और निजी संस्थानों को बेच सकती है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट्ट ने रविवार को कहा- कहा कि ये संविधान में दिए गए जनता के स्वास्थ्य के अधिकार को साफतौर पर नुकसान पहुंचा रहा है।

3 मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट की हिदायतें
1. लॉकडाउन

केंद्र और राज्य कोरोना संक्रमण रोकने के लिए लॉकडाउन लगाने पर विचार करें। अदालत कमजोर तबके पर पड़ने वाले लॉकडाउन के सामाजिक-आर्थिक नतीजों से वाकिफ है। ऐसे में अगर संक्रमण रोकने के लिए लॉकडाउन लागू किया जाता है तो इससे पहले इस तबके की जरूरतों को पूरा करने का ध्यान रखा जाए।

2. मरीजों का इलाज
अस्पताल लोकल आईडी प्रूफ के नाम पर मरीज को भर्ती करने या जरूरी दवाएं देने से इनकार न कर सके। केंद्र अस्पतालों में मरीजों को भर्ती कराने के मुद्दे पर दो हफ्ते में नेशनल पॉलिसी बनाए। इस पॉलिसी को सभी राज्यों को मानना होगा।

3. वैक्सीनेशन पॉलिसी
केंद्र वैक्सीन निर्माताओं से दामों पर मोलभाव करे। वह सारी वैक्सीन खुद खरीदे और इसके बाद राज्यों के लिए इसका अलॉटमेंट और डिस्ट्रीब्यूशन किया जाए। केंद्र राज्यों को वैक्सीन निर्माताओं के साथ दाम पर बातचीत के लिए कहा रहा है। केंद्र का तर्क है कि इससे कम्पटीशन बढ़ेगा और निजी मैन्युफैक्चरर्स मार्केट में आएंगे। इससे वैक्सीन का प्रोडक्शन भी बढ़ेगा। लेकिन, ऐसा करना 18-44 साल तक के आयु वर्ग के लिए नुकसान देह होगा। इस आयुवर्ग में “बहुजन’ या दूसरे हाशिये पर पहुंचे हुए और कमजोर तबके के लोग भी हैं। ऐसे लोगों के लिए वैक्सीन का दाम चुकाना संभव नहीं होगा।

दो दिन पहले कोर्ट ने कहा था केंद्र खुद खरीदे सारी वैक्सीन
बीते शुक्रवार को स्वत:संज्ञान लेते हुए सुप्रीम काेर्ट ने केंद्र सरकार से कई सवाल पूछे थे। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, एलएन राव और एसआर भट्‌ट की बेंच ने पूछा था कि केंद्र, राज्याें और निजी अस्पतालाें के लिए वैक्सीन की कीमत अलग-अलग क्यों रखी गई है? शीर्ष अदालत ने सरकार को राष्ट्रीय टीकाकरण माॅडल अपनाने के बारे में विचार करने का सुझाव भी दिया।

कहा था कि टीके का खर्च तमाम गरीब नहीं उठा सकते। जस्टिस भट्‌ट ने सवाल किया, ‘वैक्सीन निर्माता 300 या 400 रुपए प्रति डाेज दाम लगा रहे हैं। एक राष्ट्र के रूप में हमें इसका भुगतान क्यों करना चाहिए? कीमत का अंतर 30 से 40,000 करोड़ रुपए हो जाता है, जब हमने इसके लिए भुगतान किया है। मूल्य अंतर का कोई मतलब नहीं है।

हम निर्देश नहीं दे रहे, मगर आपको गौर करना चाहिए। एस्ट्राजेनेका अमेरिकी नागरिकों को कम कीमत पर टीके उपलब्ध करा रही है, फिर हम इतना भुगतान क्यों करें?’ केंद्र सरकार 100% वैक्सीन क्यों नहीं खरीद रही। एक हिस्सा खरीद कर बाकी बेचने के लिए वैक्सीन कंपनियों को स्वतंत्र क्यों कर दिया गया है? वैक्सीन में सरकार का भी पैसा लगा है। इसलिए वह एक सार्वजनिक संसाधन है।

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply