Domain Regd. ID: D414400000 002908407-IN Editor - vinayak Ashok Jain (Luniya) 8109913008
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

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सरकार ने एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए देश में नक्शे तैयार करने की नीति में उदारीकरण की घोषणा की है। इसके तहत भू-स्थानिक डाटा तैयार करना व उसे सरकार से हासिल करना आसान हो सकेगा। माना जा रहा है कि इससे कई नए उभरते हुए क्षेत्रों व स्टार्टअप्स को इनोवेशन में मदद मिलेगी, वे बेहतर सेवाएं दे सकेंगे और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से मुकाबला कर पाएंगे।इस बारे में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर बताया कि सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा कदम उठाया है। इन सुधारों से स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों से लेकर किसानों तक को मदद मिलेगी। वे खुद अपनी समस्याओं व चुनौतियों के बेहतर समाधान तलाश सकेंगे और इनोवेशन को बढ़ावा देंगे। वहीं विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री हर्षवर्धन ने एक प्रेस वार्ता में दावा किया कि इस डाटा को पाने और तैयार करने के नियम आसान करने से अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों को फायदा होगा। उनके अनुसार साल 2030 तक भू-स्थानिक डाटा का क्षेत्र करीब एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

क्या होता है भू-स्थानिक डाटा
जियो-स्पेशियल या भूस्थानिक डाटा दरअसल किसी खास क्षेत्र में धरती की सतह भौगोलिक स्थिति और वहां मौजूद सभी संरचनाओं की जानकारी है। इसमें किसी भी खास जगह मौजूद पहाड़, गड्ढे, खाई, नदी, तालाब, पोखर, खेत, कच्चे-पक्के निर्माण, हरियाली, कोई अन्य प्राकृतिक संरचनाएं, इनकी लोकेशन, पता, शामिल होते हैं।

अब तक क्या होता था
अब तक किसी भौगोलिक सर्वे, क्षेत्रीय नक्शा निर्माण व इनके आधार पर मोबाइल व वेब आधारित एप्लीकेशन बनाने के लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेनी होती थी। हर्षवर्धन के अनुसार देश के अधिकृत नक्शे तैयार करने वाले सर्वे ऑफ इंडिया संस्थान को भी कई एजेंसियों से अनुमति लेनी होती है।

अब क्या हो सकेगा?
विज्ञान एवं तकनीकी सचिव आशुतोष शर्मा के अनुसार अब विभिन्न अनुमति, सुरक्षा क्लीयरेंस, लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी। साथ ही सरकार से भू-स्थानिक डाटा व नक्शे हासिल करना आसान होगा।

किसे और क्या मिलेगा फायदा 
स्टार्टअप, सरकारी प्राइवेट सेक्टर के संस्थान व एजेंसियां, शोध संस्थान, किसान आदि इनोवेशन कर सकेंगे। ज्यादा रोजगार पैदा होगा। उदाहरण के लिए मोबाइल मैपिंग, रास्तों व पानी के स्रोतों का सर्वे इसके जरिये हो सकेगा। वहीं अब तक किसी नए शहर या गांव में रास्ता खोजने के लिए गूगल मैप जैसे विकल्प ही हमारे पास होते हैं, लेकिन नए इनोवेशन होंगे तो हम क्षेत्रीय और भारतीय विकल्प तैयार कर पाएंगे। सुरक्षा मामलों को छोड़कर जनता के ही धन से सरकार द्वारा अब तक जुटाया गया डाटा भी नागरिकों को मिलेगा।

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