Domain Regd. ID: D414400000 002908407-IN Editor - vinayak Ashok Jain (Luniya) 8109913008

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पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पीएम नरेंद्र मोदी की दिल्ली में गुरुवार को हुई मुलाकात का असर शीघ्र ही बिहार की राजनीति पर भी दिखेगा. दोनों नेताओं की करीब एक साल बाद दिल्ली में यह मुलाकात हुई थी. राजनीतिक पंडितों का कहना है कि दोनों की यह मुलाकात भाजपा और लोजपा के उन नेताओं के लिए एक चेतावनी है जो मौका देखते ही नीतीश सरकार पर हमला करने का कोई अवसर नहीं चूकते. दिल्ली से पटना लौटने के बाद नीतीश कुमार अपने स्वभाव के अनुसार इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन जानकार कहते हैं कि नीतीश कुमार ने पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से अपनी मुलाकात में यह स्पष्ट कर दिया है कि मौका देखते ही चौका लगाने वाले नेताओं से सरकार की बड़ी फजीहत होती है. गठबंधन के ‘बंधन’ पर सवाल खड़े होने लगते हैं. ऐसे में यह जरूरी है कि चुने हुए प्रतिनिधि सरकार पर सवाल खड़ा करने से परहेज करें.बिहार में अपराध की बढ़ती घटनाओं पर जिस प्रकार से भाजपा के सांसद और विधायकों ने सरकार पर हमला किया था उससे सरकार कठघरे में खड़ी हो गई थी. लोजपा ने भी राजद और कांग्रेस के सुर में सुर मिलाकर नीतीश पर हमला करनी शुरु कर दी थी. कानून व्यवस्था को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जयसवाल, सांसद विवेक ठाकुर और एमएलसी संजय पासवान ने टिप्पणी किया था, उससे विपक्ष और भी आक्रमक हो गई थी और सरकार असहज हो गई थी. भाजपा नेताओं के हमले पर जदयू नेताओं ने भी पलटवार करना शुरु कर दिया था. इससे जनता के बीच यह अवधारण बनी कि सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा. भाजपा के शीर्ष नेताओं को नीतीश कुमार ने अपनी इस यात्रा में यह समझाने में सफल रहे. सूत्र कहते हैं कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने भी इसे गंभीरता से लिया है और इसपर शीघ्र ही कार्रवाई के आश्वासन भी दिया. शीघ्र ही यह जमीन पर भी दिखेगा.

कैबिनेट विस्तार से पहले बहुत तेजी से यह प्रचारित होता रहा कि भाजपा में अब सुशील मोदी के नरम दौर नहीं रहे. पार्टी अब वैसे लोगों को कैबिनेट में जगह देगी जो नीतीश कुमार के आंख में आंख मिलाकर बात कर सके. पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुस्सैन का नाम भी उन्हीं सख्त चेहरों में लिया जा रहा था, लेकिन कैबिनेट विस्तार के दौरान शाहनवाज हुस्सैन को जो विभाग मिला उससे साफ हो गया कि जदयू ही नहीं भाजपा में भी विभागों के बंटवारे में नीतीश कुमार की ही चली. सरकार में उन्हें उद्योग विभाग की जिम्मेवारी दी गई, जो कि बिहार में वर्षो से अकाम विभाग की श्रेणी में है.

भाजपा के निर्णायकों और नीतीश कुमार के बीच क्या बात हुई यह तो मीडिया के सामने पूरी तरह से नहीं आयी. सीएम ने अपनी मुलाकात को लेकर जो कुछ कहा वह सामान्य था. लेकिन, कैबिनेट विस्तार के बाद उनके विभाग के बंटवारे और दिल्ली में पीएम मोदी से लेकर अमित शाह से हुई मुलाकात ने बिना किसी के कुछ बोले स्पष्ट कर दिया कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और नीतीश कुमार के बीच किसी तीसरे की कोई गुंजाइश नहीं है. यही कारण है कि कैबिनेट के गठन और विधान परिषद की मनोनयन वाली सीटों में लोजपा को तरहीज नहीं दी गई. बहुत संभव है कि भाजपा में लोजपा के दोस्तों की संख्या बहुत कम हो जाए. यह अप्रत्यक्ष रूप से हो भी रहा है. उसके एक विधायक सरकार को समर्थन भी दे रहे हैं. (डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.)



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