Domain Regd. ID: D414400000 002908407-IN Editor - vinayak Ashok Jain (Luniya) 8109913008
Wednesday, May 12

Please Play for Watching SD News Live TV (News + Entertainment)

West Bengal Assembly Election Results: बंगाल चुनाव में बीजेपी आखिर क्यों नहीं दोहरा पाई लोकसभा जैसा प्रदर्शन?


West Bengal Assembly Election 2021: पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी जंगलमहल, हुगली और जलपाइगुड़ी जैसे मजबूत माने जाने इलाकों में भी हार गई और महज 75 सीटें ही जीत सकी. आखिर बीजेपी का 200+ का दावा कैसे फेल हुआ और पार्टी लोकसभा चुनाव जैसा प्रदर्शन क्यों नहीं दोहरा पाई?

West Bengal Assembly Election 2021: पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी जंगलमहल, हुगली और जलपाइगुड़ी जैसे मजबूत माने जाने इलाकों में भी हार गई और महज 75 सीटें ही जीत सकी. आखिर बीजेपी का 200+ का दावा कैसे फेल हुआ और पार्टी लोकसभा चुनाव जैसा प्रदर्शन क्यों नहीं दोहरा पाई?

कोलकाता. साल 2019 के लोकसभा चुनावों में मिली सफलता के आधार पर भाजपा, पश्चिम बंगाल (West Bengal Assembly Election Results) में नए क्षेत्रों में विस्तार करने की कोशिश में थी. भाजपा चाहती थी कि वह 121 विधानसभा क्षेत्रों से पार्टी को 147 सीटों तक पहुंचाए ताकि बंगाल में वह स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बना ले. लेकिन बीजेपी का निशाना चूक गया और पार्टी जंगलमहल, हुगली और जलगिपुरी जैसे गढ़ वाले क्षेत्रों में हार गई और सिर्फ 75 सीटों तक सिमट गई. भाजपा ने मिदनापुर और दक्षिण 24 परगना जिले में अपना दायरा बढ़ाने की कोशिश की. शुवेंदु अधिकारी, नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराने की कोशिश में लग गए. दक्षिण 24 परगना में, भाजपा ने डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक आक्रामक अभियान चलाया. लेकिन इन सबके बीच भाजपा ने जंगलमहल क्षेत्र में कई सीटें गंवा दीं, जो पहले दो चरणों में बनर्जी के साथ गए और TMC ने आदिवासी बेल्ट में मजबूत वापसी की. टीएमसी ने आरोप लगाया था कि चुनाव का शेड्यूल भाजपा की मदद करने के लिए बनाया गया. उसका आरोप था कि ऐसे चुनावी शेड्यूल से भाजपा की उन क्षेत्रों में मदद की जा रही है जहां वह पहले के चरणों में मजबूत थी. लेकिन परिणाम देखें तो टीएमसी ने इन चरणों में लोगों के बीच जगह बनाई. परिणामों से पता चलता है कि भाजपा आठ चरणों के चुनाव में उस तरह गति नहीं पकड़ पाई और चौथे चरण के बाद टीएमसी पूरी ताकत से आगे बढ़ गई. जंगलमहल इलाके में भाजपा का खाता नहीं खुला!अधिकारी ने बनर्जी को नंदीग्राम में हरा दिया और भाजपा ने मिदनापुर में पांच और सीटें जीतीं.  लेकिन जंगलमहल में जो बड़ा नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई इससे नहीं हो सकती थी.  24 परगना जिले में टीएमसी केवल ISF सुप्रीमो अब्बास के भाई की सीट पर हारी और बाकी 30 सीटें उसके ही खाते में गईं. जंगलमहल इलाके में भाजपा का खाता तक नहीं खुल सका. BJP हुगली भी हार गई, जहां सांसद लॉकेट चटर्जी ने अपनी खुद की सीट खो दी. इसके साथ ही राज्यसभा के पूर्व सांसद स्वपन दासगुप्ता को भी मैदान में उतारा था, लेकिन वह भी हार गए. हावड़ा में बीजेपी की उम्मीद रहे राजीब बनर्जी अपनी ही सीट डोमजूर से हार गए. मतुआ बेल्ट बरकरार, लेकिन मालदा-मुर्शिदाबाद ने TMC का ‘तूफान’ ला दिया
भाजपा ने बनगांव का मटुआ बेल्ट बरकरार रखा. हालांकि मालदा और मुर्शिदाबाद में टीएमसी के पक्ष में हुए मतदान के चलते बीजेपी का मटुआ बेल्ट पर काबिज रहना भी किसी का काम नहीं आया. मुर्शिदाबाद-मालदा की सीटें ज्यादातर कांग्रेस और वाम दलों के पास थीं. भाजपा को उम्मीद थी कि तीसरा मोर्चा यहां टीएमसी को नुकसान पहुंचाएगा, जिससे मुस्लिम बहुल क्षेत्र में कुछ सीटें भाजपा को मिलेंगी. लेकिन कैंपेनिंग के दौरान सीतलकुची में हुई हत्याओं के मुद्दे पर तीसरा मोर्चा नदारद रहा. इसने टीएमसी को अप्रत्याशित मौका दिया और बनर्जी ने उसी पर दांव लगाया.

साल 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने उत्तर बंगाल के जलपाइपुड़ी क्षेत्र में भी जीत दर्ज की थी, लेकिन टीएमसी ने यहां भी वापसी की. ममता ने जलपाइपुड़ी, उत्तरी दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर जिलों में सीटें जीतीं. वहीं बीजेपी शहरी कोलकाता सीटों या उत्तरी 24 परगना की शहरी सीटों में कोई बढ़त बनाने में सफल नहीं हो पाई. बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साहा, अभिनेत्री पायल सरकार और बाबुल सुप्रियो जैसे सभी प्रमुख उम्मीदवार हार गए. बीजेपी ने शहरी कोलकाता सीटों में भद्रलोक (बुद्धिजीवियों) के लिए कैंपेन शुरू किया था, लेकिन मतदाताओं पर इसका भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा. टीएमसी ने कोलकाता में भवानीपुर सीट भी जीती.







Source link

Leave a Reply