Domain Regd. ID: D414400000 002908407-IN Editor - vinayak Ashok Jain (Luniya) 8109913008
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पट पट। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (पीएम नरेंद्र मोदी) ने देश के युवाओं से ‘नमो एप’ पर ऐसी स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानकारी साझा करने की अपील की थी जिनकी चर्चा कम होती है। इसी क्रम में मुंगेर के जयराम विप्लव ने तारापुर शहीद दिवस (तारापुर शहादत दिवस) के बारे में जानकारी ली थी। पीएम मोदी ने आकाशवाणी पर 31 जनवरी 2021 को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में मुंगेर की 15 फरवरी 1932 की उस घटना की चर्चा की जिसमें 34 स्वतंत्रता सेनानी शहीद हो गए थे। खास बात यह है कि ये से 13 वीर सपूतों की पहचान हो गई थी, लेकिन बाकी 21 अज्ञात ही रह गए थे। बता दें कि इसी शहादत के लिए प्रत्येक वर्ष 15 फरवरी को मनाया तारापुर दिवस मनाया जाता है।दरअसल 15 फरवरी 1932 को आजादी के दीवानों ने तारापुर थाना पर तिरंगा झंडा फहराने के लिए अपने सीने पर अंग्रेजों की गोलियां खाईं थीं। उनके अंदर तिरंगा फहराने का जुनून ऐसा है कि हरेंदु गिरती बनी हुई हैं। गोलियों की सोवियत के बीच आजादी के दीवानों ने आखिरकार तारापुर थाना पर तिरंगा झंडा फहरा ही दिया था।

हर साल 15 फरवरी को मनाया जाता है तारापुर दिवस

पूरी घटना के बारे में इतिहासकार बताते हैं कि बिहार के मुंगेर में 15 फरवरी 1932 की दोपहर में स्वतंत्रता के नारों के साथ क्रांतिवीरों का जत्था निकला था। इसके साथ लोगों को घरों से बाहर आने में लगे हुए हैं। तारापुर थाना भवन के पास भीड़ जमा हो गई। बैनर दल तिरंगा हाथों में लिए बेख़ौफ़ बढते जा रहे थे और उनका मनोबल बढ़ाने के लिए जनता खड़ी होकर ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम्’ का जयघोष कर रही थी।

खुद गिर गए पर तिरंगा नहीं गिरने दिया

इतिहासकार बताते हैं कि मौके पर थाना में कलेक्टर ईओली और एसपी डब्लूएस मैग्रेथ ने निहत्थे स्वतंत्रता सेनानियों पर अंधाधुंध गोलियां चलवा दी थी। नौ आजादी के दीवाने नौजवान वहाँ से हिले नहीं और सीने पर गोलियां खाई। इसी तरह जीनगर दल के मदन गोपाल सिंह, त्रिपुरारी सिंह, महावीर सिंह, कार्तिक मंडल, परमानंद झा ने तिरंगा फहरा दिया। अंग्रेजी हुकूमत की इस बर्बर कार्रवाई में 34 स्वतंत्रता प्रेमी शहीद हो गए थे। इनमें से 13 की तो पहचान हुई बाकी 21 अज्ञात ही रह गए थे। आनन-फानन में अंग्रेजों ने कायरतापूर्वक वीरगति को प्राप्त कई सेनानियों के शवों को वाहन में लदवाकर सुल्तानगंज भिजवाकर गंगा में बहवा दिया था।

13 वीर सपूतों की हुई पहचान, 21 अज्ञात रहे

जिन 13 वीर सपूतों की पहचान हो गई उनमें विश्वनाथ सिंह (छत्रधर), महिपाल सिंह (रामचुआ), शीतल चमार (असरगंज), सुकुल सोनार (तारापुर), संता पासी (तारापुर), झोंटी झा (सतखरिया), सिंहेश्वर राजहंस (बिहमा) , बदरी मंडल (धनपुरा), वसंत धानुक (लौढिया), रामेश्वर मंडल (पीडवारा), गैबी सिंह (महेशपुर), अशर्फी मंडल (तिकारी) और महतो (थड़गांव गांव, असरगंज (मुंगेर)) शामिल थे। इस घटना ने अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग गोलीकांड की बर्बरता की याद ताजा कर दी थी।



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