Domain Regd. ID: D414400000 002908407-IN Editor - vinayak Ashok Jain (Luniya) 8109913008
Home

[ad_1]

पट पट। बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार (सीएम नीतीश कुमार) और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (उपेंद्र कुशवाहा) की मुलाकात के बाद सियासत तेज हो गई है। दोनों नेताओं के साथ ज़ीयू के सीनियर नेता वशिष्ठ नारायण सिंह भी मौजूद थे। वहीं, इस मुलाकात के बाद ऊपरेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार और मैं कभी अलग-अलग नहीं थे। हां, बस राजनीतिक रूप से जरूर अलग थे। इसके साथ उन्होंने कहा कि आगे क्या होगा, वर्तमान में इस पर क्या बोलता है?यही नहीं, नीतीश और कुशवाहा की मुलाकात पर जदयू नेता वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि दोनों की मुलाकात अच्छी रही। हालांकि कुशवाहा कभी भी हमसे दूर नहीं रहे हैं। हां, बीच में राजनीतिक दूरियां भले ही हो गईं। उम्मीद है कि उनके (कुशवाहा) आने से ज़ीयू को मज़बूती मिलेगी। इसके साथ उन्होंने कहा कि यह सब कब होगा इसके बारे में मुझे कुछ पता नहीं है, लेकिन नीतीश कुमार और कुशवाहा का मिलन स्वाभाविक रूप से है।

बता दें कि हाल में ही जब 17 वीं बिहार विधानसभा में पहले सत्र के अंतिम दिन (27 नवंबर) नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एनडीए के विधायकों पर की गई अमर्यादितियों के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आक्रोशित हो उठे थे और पहली बार सदन में उन्हें काफी तल्ख अंदाज में देखा गया। उन्होंने तेजस्वी यादव के आचरण को अशोभनीय कहा। इसी बात को लेकर अपेंद्र कुशवाहा ने तेजस्वी के व्यवहार की आलोचना करते हुए सीएम नीतीश कुमार के साथ खड़े रहने का ऐलान किया था।

उपेंद्र कुशवाहा, नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, नीतीश कुमार

कुशवाहा ने तेजस्ववी यादव के हमले के बाद सीएम नीतीश कुमार के साथ खड़े रहने का ऐलान किया था।

इसी तरह के विवरण के बाद सीएम नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात का अनुरोध किया था। इसके बाद कुशवाहा ने सीएम आवास पर जाकर नीतीश से मुलाकात की थी। वहीं, एक बार फिर दोनों नेताओं के बीच मुलाकात ने बिहार की सियासत को तेज कर दिया है। जबकि राजनीतिक जानकार बता रहे हैं कि कुशवाहा और नीतीश कुमार की मुलाकात का नतीजा भी सामने आएगा और बिहार में जल्द ही नए राजनीतिक समीकरण देखने को मिल सकते हैं।

विधान परिषद के बहाने बनेगी बात
वास्तव में राज्य में लोकसभा, विधानसभा और राज्यसभा की सभी सीटें भर गई हैं। सिर्फ विधान परिषद की 18 बैठकें खाली हैं, जिनमें 12 मनोनयन कोटे की और दो विधानसभा कोटे की बुकिंग हैं। चार स्थानीय प्राधिकार कोटे की बैठकें हैं, जिनके लिए अगले साल चुनाव होंगे। यह संभव है कि विधान परिषद के बहाने दोनों नेताओं के बीच फिर से बात बन सकती है। इसके अलावा लव-कुश समीकरण तो सीएम नीतीश कुमार की पहली पसंद है।

नीतीश-कुशवाहा बैठक से निकलेगी सियासी राह?
राजनीतिक जानकार कहते हैं कि नीतीश कुमार इस बार एनडीए में छोटे भाई की भूमिका में आ गए हैं और राजनीतिक रूप से कमजोर भी दिखते हैं। हालांकि नेतृत्व उन्हीं का है, पर विरोध का वातावरण यथावत है। वहीं, कुशवाहा केंद्र सरकार से बाहर निकलकर गलती कर चुके हैं और बिहार विधानसभा चुनाव में भी उनके हिस्से एक भी सीट नहीं आई है। जाहिर है वे भी राजनीतिक रूप से एक तरह से हाशिए पर हैं। ऐसे में सवाल यह है कि नीतीश और कुशवाहा की दोस्ती की दिशा क्या होगी?



[ad_2]

Source by [author_name]

Avatar

Leave a Reply