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Wednesday, May 12

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रमजान माह में मुस्लिम समाज एवं बोहरा समाजजन खुदा की इबादत मंे है मुष्गल, प्रतिदिन रोज रखने, मस्जिदों मंे नमाज अता करने के साथ नेकी के किए जा रहे कार्य


सच्चा दोस्त न्युज से मनीश कुमट (जैन) व दौलत गोलानी की रिपोर्ट
झाबुआ। मुस्लिम समाज एवं बोहरा समाज का इन दिनांे रमजान माह चल रहे है। यह महीना अत्यंत पवित्र होकर इस महीने में समाजजनों द्वारा रोजा रखने, कोविड के नियमांे का पालन करते हुए मस्जिदों में जाकर विषेष नमाज अता करने और नेकी (दान-पुण्य) करने जैसे कार्यों को विषेष महत्व दिया जा रहा है। इन कार्यों में समाजजन पूरी तरह मषगुल है।
वर्तमान में जिले में कोरोना का प्रकोप भी तेजी से बढ़ रहा है। इस बीच दोनो समाज के ऐसे लोग जो शासकीय नौकरियों, या चिकित्सा क्षेत्र तथा इमरजेंसी सेवाओं से जुड़े होने से वे रमजान माह में धर्म करने के साथ अपने कर्म के प्रति भी पूरी तरह से समर्पित होकर एक अनुपम उदारण पेष कर रहे है। साथ ही मुस्लिम समाज के कई युवा एवं कमेटियां इस बीच जिले मंे जो कोरोना संक्रमित मरीज, चाहे वह किसी भी धर्म या संप्रदाय के हो, उनका परिवार में यदि कोई नहीं है, तो उनके अंतिम संस्कार भी उसी धर्म के रीति-रिवाज अनुसार कर कोमी एकता और सांप्रदायिक सौहार्दता की अनूठी मिसाल पेष कर रहे है।
झाबुआ एवं थांदला में किया मृतकों का अंतिम संस्कार
ऐसे ही मामला झाबुआ के रोहीदास मार्ग मंे एक जैन समाज की महिला के कोरोना से निधन होने के बाद परिवारजनांे की मद्द के लिए मुस्लिम समाज के कई युवाओं ने आगे हाथ बढ़ाकर तथा अपने पड़ौसी होने की जिम्मेदारी निभाते हुए महिला का मुक्तिधाम पर हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार कर अपना फर्ज अदा किया। इसी प्रकार थांदला में भी समाज के युवा और अन्यजनों ने अग्रणीय भूमिका अदा करते हुए हिन्दू संप्रदाय के व्यक्ति की मृत्यु होने पर उनके पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार करने जैसा अनुपम कार्य किया है।
धर्म, कर्म के साथ फर्ज की भी अदायगी
समाजजनों का कहना है कि खुदा (अल्लाह) हमे सीख देते है कि हम रमजान माह में धार्मिक क्रियाओं में लीन रहने के साथ अपने कर्मों का भी पूरी तरह से पालन करे तथा अपने दायित्वों का भी पूर्ण रूप से निर्वहन करे। साथ ही किसी जरूरतमंद या निर्धन की मद्द की जाए, तो यह मौका भी नहीं छोड़ना चाहिए। इसलिए मुस्लिम एवं बोहरा दोनो समाज के लोग रमजान के पाक महीने में धर्म-कर्म करने के साथ अपना फर्ज भी बखूबी अदा कर रहे है।
ईदुलफित्तर मनाई जाएगी
रमाजन माह में 10-10 दिनांे के तीन असरे होते है। इन दिनांे में दोनो ही समाज के लोग, विषेषकर छोट-छोटे बच्चें भी रोज रख रहे है। साथ ही नमाज बाद इफतारी भी की जा रहंी है। दान-पुण्य करने जैसे कार्य भी प्राथमिकता से कर रहे है। रमजान माह के अंतिम दिन चांद के दीदार होने पर अगले दिन ईदुलफित्तर (मीठी ईद) मनाई जाएगी।


फोटो 007 -ः पवित्र रमजान माह।

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