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Wednesday, May 12

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कोरोना ने कर्नाटक के उड़ाए होश, मरने वालों में 30 फीसदी को नहीं थी कोई बीमारी


वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर वी. रवि ने कहा कि संक्रमण के लक्षण बदल गए हैं. लोगों को बिना समय गंवाए डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. फाइल फोटो

Covid-19 in Karnataka: 270 मृतकों में 92 लोगों ने टेस्टिंग के समय किसी गंभीर बीमारी की शिकायत नहीं की थी और इनमें से 38 लोगों की उम्र 50 साल से नीचे की थी.

नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) की दूसरी लहर ने बेंगलुरु में कोहराम मचा रखा है. दरअसल वायरस संक्रमण के चलते बेंगलुरु में जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें 30 प्रतिशत लोगों को कोई गंभीर बीमारी नहीं थी. दूसरे शब्दों में कहें तो कथित हेल्दी लाइफ स्टाइल फॉलो करने वाले लोग कोरोना के ज्यादा शिकार हुए हैं. राज्य सरकार द्वारा संकलित किए गए कोरोना से हुई मौतों के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि 50 कोरोना संक्रमित (जिन्हें कोई दूसरी बीमारी नहीं थी) बेंगलुरु और अन्य जिलों में प्रतिदिन वायरस संक्रमण के शिकार हो रहे हैं. गुरुवार को कर्नाटक में 270 लोगों की कोरोना वायरस संक्रमण के चलते मौत के मामले दर्ज किए गए, जिनमें 92 लोगों ने टेस्टिंग के समय किसी गंभीर बीमारी की शिकायत नहीं की थी और इनमें से 38 लोगों की उम्र 50 साल से नीचे की थी. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक संक्रमण के चलते मौत के शिकार में लोगों में से कुछ तो ऐसे थे, जिनकी तबीयत खराब होने के कुछ ही घंटों के भीतर मौत हो गई. महामारी विशेषज्ञ और कोविड टेक्निकल एडवायजरी कमिटी के सदस्य डॉक्टर गिरिधर आर. बाबू (Giridhar R. Babu) इस बारे में कहते हैं, “देश की आबादी पर अचिन्हित बीमारियों का बोझ है, खासतौर पर युवा आबादी पर. हमने कुछ समय पहले एक अध्ययन किया था और पाया था बेंगलुरु के आईटी प्रोफेशनल्स में हाई ब्लड प्रेशर और हाइपर टेंशन की समस्या बहुत ज्यादा है, जिनके बारे में वे खुद भी अंजान थे. इसके अलावा जिन लोगों का इम्युन सिस्टम मजबूत नहीं होता है या वायरस संक्रमण के प्रति उनका शरीर कमजोर पड़ता है, वे वायरस के ज्यादा शिकार हो रहे हैं.” वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर वी. रवि ने कहा कि संक्रमण के लक्षण बदल गए हैं. लोगों को बिना समय गंवाए डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. बुखार, खांसी और बदनदर्द के अलावा नए लक्षणों में पेट दर्द, बेहोशी और लूज मोशन के लक्षण दिख रहे हैं.कोविड एडवायजरी कमिटी के चेयरपर्सन डॉक्टर एमके सुदर्शन ने कहा कि युवा आबादी कोविड व्यवहार के प्रति लापरवाह नजर आ रही है. युवा आबादी अपने फिटनेस को लेकर ओवर कॉन्फिडेंट है. हालांकि ये वायरस युवा लोगों को शिकार बनाने के लिए नहीं जाना जाता है. लेकिन, ज्यादातर मामलों में देरी (व्यक्तिगत और व्यवस्थागत) के चलते असर पड़ रहा है.

उन्होंने कहा कि उम्र के चलते युवा लोगों को कोई इम्युनिटी नहीं मिलने वाली है. इन लोगों को उतना ही सतर्क रहने की जरूरत है, जितना बुजुर्ग लोगों को.







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