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एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा दिए गए भाषण के कुछ अंश: नेकी ही घर, देश और दुनिया को एक बनाएगी, महान उद्देश्य ही हमें प्रेरणा देते हैं


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12 मिनट पहले

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एपीजे अब्दुल कलाम, एपीजे अब्दुल कलाम, भारत के पूर्व राष्ट्रपति

मुझे हमेशा लगता है कि जब हम अपने जीवन में किसी को कुछ दे पाते हैं, तो वही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। फिर वह ज्ञान हो या फिर आप किसी को अपनी सेवाएं दे रहे हों। या किसी के लिए कुछ अच्छे शब्द ही क्यों न कह रहे हों। अगर आप किसी की जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं, उसकी जिंदगी में खुशी ला सकते हैं, तो यह सबसे अच्छा कार्य है, जो एक इंसान कर सकता है। इससे बेहतर कुछ भी नहीं है। जब सभी ऐसा करेंगे तो दुनिया से संघर्ष खत्म हो जाएंगे।

मैं अक्सर कहा करता हूं कि जब दिल में नेकी होती है, तो चरित्र खूबसूरत बनता है। जब चरित्र खूबसूरत होता है, तो घर में एकता और तालमेल बढ़ता है। जब घर में यह सामंजस्य होता है, तो देश में व्यवस्था और शांति रहती है। जब देश में शांति रहती है, तो पूरे विश्व में शांति स्थापित होती है। यह पूरे विश्व के लिए सही है। हमें देश में व्यवस्था और शांति तथा घर में सामंजस्य की ही जरूरत है।

हमें इस धरती को खुश, समृद्ध और शांतिपूर्ण समाज देने की दिशा में काम करना चाहिए। ऐसा करने में शिक्षा, धार्मिक आध्यात्मिकता और आर्थिक विकास, तीनों की महत्वूर्ण भूमिका है। हमने देखा कि विश्व में शांति और खुशी के बीज नेकी में है। नेक नागरिक की प्रबुद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं। हमें यह नेकी अपने बच्चों के मन में स्थापित करनी होगी। पांच से 17 साल ही उम्र में उन्हें यह मूल्य देना हमारा मिशन होना चाहिए। इससे मुझे एक ग्रीक कहावत याद आती है, ‘मुझे सात साल के लिए एक बच्चा दें, उसके बाद उस बच्चे को ईश्वर को दे दें या शैतान को। वे उस बच्चे को बदल नहीं पाएंगे। यह शिक्षक और बच्चों के मन, दोनों की शक्ति बताता है।

मुझे याद है, जब मैं सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली में पढ़ता था, तब वहां मेरे शिक्षक रेव फादर रेक्टर कलाथिल हर सोमवार एक विशेष कक्षा लेते थे। इस कक्षा में वे हमें अच्छे इंसानों के वर्तमान और अतीत के बारे में बताते थे। साथ ही बताते थे कि एक अच्छा इंसान कैसे बना जाए। वे हमें बुद्ध, कंफ्यूशियस, अब्राहम लिंकन, महात्मा गांधी, आइंस्टीन आदी के बारे में और हमारी विरासत के बारे में बताया करते थे। वे बताते थे कि महान शख्सियतें, अच्छा इंसान कैसे बनीं। भले ही वे लेक्चर मुझे 1950 के दशक में दिए गए थे, लेकिन वे मुझे आज भी प्रेरित करते हैं। ऐसी ही प्रेरणा हमें अपने बच्चों को देने की जरूरत है, ताकि वे नेकी के मार्ग पर चलें।

दूसरी बात धार्मिक आध्यात्मिकता की थी। हर धर्म के सिद्धांत जरूर अलग-अलग हैं, लेकिन सभी के आध्यात्मिक मूल्यों में एक चीज समान है। सभी में ऐसे इंसानी मूल्य सिखाए जाते हैं, जिनके जरिए बेहतर जीवन और समाज का कल्याण प्रोत्साहित हो सके। मुझे लगता है कि सभी धर्मों के आध्यात्मिक तत्व उन्हें आपस में जोड़ सकते हैं, जिससे वे मिलकर मानवता के हित के लिए काम कर सकते हैं।

इस दोनों प्रेरणाओं को हमें अपना मिशन बनाना होगा। इस मिशन को पूरा करने के लिए हम महर्षि पतंजलि से भी प्रेरणा ले सकते हैं, जिन्होंने 2500 वर्ष पहले कहा था, ‘जब आप किसी महान उद्देश्य से प्रेरित होते हैं, कुछ असाधारण करने की इच्छा से प्रेरित होते हैं, तो आपके विचार अपने सारे बंधनों को तोड़ देते हैं। आपका मन सीमाओं के परे चला जाता है। आपकी चेतना हर दिशा में फैल जाती है और आप खुद को एक नई, महान और शानदार दुनिया में पाते हैं। आपके अंदर सुसुप्त ताकतें और हुनर जाग जाते हैं और आप पाते हैं कि आप इतने महान व्यक्ति बन चुके हैं, जिसकी कल्पना आपने सपनों में भी नहीं की थी।’

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