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January 17, 2021

Sachcha Dost

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सूचना का अधिकार कानुन को लोक सूचना अधिकारी ने दिखाया ठेगा, अपीली सुनवाई के दौरान 74 दिन बाद आवेदन किया खारिज ।। भष्टाचार उजागर के भय से की अपीली अधिकारी के आदेश की अवहेलना (मामला-ग्राम पंचायत गणेशपुर ला. का)

सूचना का अधिकार कानुन को लोक सूचना अधिकारी ने दिखाया ठेगा,
अपीली सुनवाई के दौरान 74 दिन बाद आवेदन किया खारिज ।।
भष्टाचार उजागर के भय से की अपीली अधिकारी के आदेश की अवहेलना
(मामला-ग्राम पंचायत गणेशपुर ला. का)
मतीन रजा…9827077973
लालबर्रा
– सूचना का अधिकार हर एक भारतीय का मौलिक अधिकार है, वे अधिनियम 2005 की धारा (6) (1) के तहत किसी भी सरकारी विभागो से जानकारी हासिल कर सकता है। जिसके लिये बकायदा शासन द्वारा समस्त सरकारी विभागों के कार्यालयो में एक या एक से अधिक अधिकारियो को लोक सूचना अधिकारी का दायित्व सौपा गया है। जिनका दायित्व व कर्तव्य है, कि वे आवेदनकर्ता द्वारा मांगी गई जानकारी की सूचना विभागीय पदाधिकारियों तक पहंुचाये, ताकि वे समयसीमा पर आवेदनकर्ता को जानकारी प्राप्त हो सके। लेकिन लालबर्रा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत गणेशुपर में सचिव के पद पर पदस्थ लोकसूचना अधिकारी श्रीमती आशा माने द्वारा आवेदन तिथि के 74 दिन भष्ट्रªªाचार उजागर होने के भय से आवेदन को खारिज कर दिया, जबकि उक्त मामले में अपीली अधिकारी के समक्ष जनपद पंचायत लालबर्रा में 14 दिसम्बर 2020, 23 दिसम्बर 2020 व 4 जनवरी 2021 को आवेदक एवं अनावेदको की मौजुदगी में सुनवाई हो चुकि है, अंतिम सुनवाई के दौरान ग्राम पंचायत गणेशपुर सचिवध्लोक सूचना अधिकारी द्वारा सुनवाई में अपीलीधिकारी के समक्ष आवेदककर्ता को 11 जनवरी 2021 को जानकारी प्रदान करने की बात कही थी, जिसका बकायदा अपीलीधिकारी द्वारा तैयार नोटशीट में दोनो पक्षो के हस्ताक्षर है, बावजूद इसके लोक सूचना अधिकारी द्वारा उसी तिथि अर्थात 11 जनवरी 2012 पर जानकारी देने का जिक्र किया गया है, लेकिन वे भष्ट्राचार उजागर होने के भय से जानकारी ना देते हुए 74 दिन बाद आवेदन खारिज कर दिया। जिससे आप स्वयं कयास लगा सकते है, कि आवेदककर्ता ने सरपंच-सचिव द्वारा करवाये गये पंचायत कार्यो में हुए भष्टाचार व अनिमिताओं के प्रति दुखते दर्द में हाथ तो नही रख दिया, तभी तो लोक सूचना अधिकारी श्रीमती आशा माने ने आवेदनकर्ता के आवेदन को 74 दिन बाद खारिज कर दिया।


क्या है पूरा मामला-
इससे पहले भी हो चुकि है, कार्यवाही
  आवेदकर्ता प्रेस प्रतिनिधि मतीन रजा द्वारा जनहित व समाचार प्रकाशन हेतु सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा (6) (1) के तहत रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से गत गत 28 अक्टूबर 2020 को ग्राम पंचायत गणेशपुर में दो बिंदुओ पर आवेदन किया था, जिसे लो.सू.अधिकारी श्रीमती आशा माने महोदय ़़द्वारा स्वीकार तो कर लिया गया परंतु 11 जनवरी 2021 को तीसरी सुनवाई में उपस्थित ना होते हुए आदेदन खारिज कर दिया। लोक सूचना अधिकरी मेडम को यदि आवेदन खारिज करना ही था, तो समय सीमा के भीतर ही कर देती इस तरह अपीली प्रोसेस के दौरान आवेदन खारिज करने का अधिकार उन्हे नही ब्लकि अपीली अधिकारी को था, जो सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा (6) (1) व आवेदककर्ता के अधिकार का हनन एवं अपीली अधिकारी के आदेश की अवहेलना के दायरे में है, जिसके एवज में लोक सूचना अधिकारी पर अनुच्छेद 20 के तहत अपीली अधिकारी राज्य सूचना आयोग से क्या अनुशंसा करते है।
     विदित हो कि उक्त पंचायत पर पहले भी नाली-सड़क सहित अन्य निर्माण कार्यो के मामलो पर कार्यवाही हो चुकी है, वही मोटर सायकल पर रेत परिवहन मामले में तत्कालिन सचिव पर निलंबन एवं सरपंच-सचिव पर पथक-पथक पचास-पचास हजार रूपयो का अर्धदंड की कार्यवाही हो चुकि है। बावजूद इसके संबंधित ग्राम प्रधान श्रीमती सुकवंता सुकचंद वरकड़े, सचिव श्रीमती आशा माने व रोजगार सहायक सुरेश कटरे है, कि अपने कार्य के प्रति जिम्मेदार नही है, वे अब भी बेथड़क अपनी मोनोपल्ली झाड़ रहे है। 
इनका कहना है-
  उक्त पंचायत के भष्ट्राचार संबंधित अनेको मामले आरटीआई से मिली जानकारी पर समाचार पत्रो के माध्यम से पहले भी उजागर किये जा चुके है, जिसके एवज में प्रशासन द्वारा इन पर अर्धदंड़ व निलंबन सहित अन्य कार्यवाही की जा चुकि है, इसी कार्यवाही से बचने हेतु इन्होने अपीली अधिकारी के आदेश की अवहेलना करते हुए 74 दिन बाद आवेदन खारिज किया जो न्यायपूर्ण नही है, जिनके विरूध्द दृतीय अपील दायर कर माननीय न्यायालय को नये-पुराने सहित समस्त मामलो से अवगत करवाया जायेगा। 
मतीन रजा
आवेदनकर्ता

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     तीन सुनवाई करने के पश्चात संबंधित लोक सूचना अधिकारी द्वारा 11 जनवरी को चाही गई जानकारी आवेदनकर्ता को मुहैया करवाने की बात कही गई थी, किंतु आवेदनकर्ता से ज्ञात हुआ कि उन्हे जानकारी प्रदत्त नही की गई, जो न्याय संगत नही है। चुकि अपीली कार्यवाही के दौरान आवेदन खारिज करने या ना करने का अधिकार अपीली अधिकारी का होता है, नाकि लोक सूचना अधिकारी का, यदि उन्होने ऐसा किया है, तो निश्चित ही लोसूअधि के विरूध्द कार्यवाही हेतु द्वितीय अपीली अधिकारी से अनुशंसा की जायेगी। 
गौरीशंकर डहेरिया
मुख्य कार्यपालन अधिकारी

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   उक्त मामले में जब ग्राम पंचायत गणेशपुर सचिव/लोक सूचना अधिकारी श्रीमती आशा माने से दूरभाष पर चर्चा करनी चाही तो उन्होने फोन रिसिव करना उचित नही समझा।
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