Domain Regd. ID: D414400000 002908407-IN Editor - vinayak Ashok Jain (Luniya) 8109913008
Tuesday, May 11

Please Play for Watching SD News Live TV (News + Entertainment)

आयुष मंत्रालय का दावा, आयुष 64 दवा कोरोना के हल्के और मध्यम लक्षणों वाले केस में कारगर


नई दिल्ली. आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण के हल्के और मध्यम कैटेगिरी के लक्षणों वाले और बिना लक्षणों वाले मरीजों के लिए आयुष 64 दवा को काफी फायदेमंद बताया है. मंत्रालय के मुताबिक माइल्ड और मॉडरेट श्रेणी के कोविड मरीजों के इलाज में दवा काफी फायदेमंद है. आयुष मंत्रालय ने सीएसआईआर, आईसीएमआर (ICMR) की निगरानी में आयुष 64 के प्रभाव का देश के अलग-अलग अस्पतालों में मरीजों पर अध्ययन किया. इस अध्ययन में पाया गया है कि दवा के इस्तेमाल से मरीजों की रिकवरी जल्दी हुई है. बता दें कि इस दवा का देश में तीन जगहों पर ट्रायल हुआ था, जिनमें लखनऊ, वर्धा और मुंबई में मरीजों पर दवा के प्रभाव का आकलन किया गया. बता दें कि आयुष 64 दवा मलेरिया के मरीजों को दी जाती रही है। ये दवा नेशनल क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल में भी शामिल है. स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह दूसरी ओर स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को ‘कोविड-19 के मामूली लक्षण वाले रोगियों के गृह पृथक-वास की खातिर संशोधित दिशानिर्देश’ जारी किए जिसमें घर पर रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदने या लगाने का प्रयास नहीं करने की सलाह दी. मंत्रालय ने कहा कि इसे केवल अस्पताल में ही लगाया जाना चाहिए. दिशानिर्देश में कहा गया है कि मामूली लक्षण में स्टेरॉयड नहीं दिया जाना चाहिए और सात दिनों के बाद भी अगर लक्षण बने रहते हैं (लगातार बुखार, खांसी आदि) तो उपचार करने वाले चिकित्सक से विचार-विमर्श कर कम डोज का ओरल स्टेरायड लेना चाहिए.गर्म पानी का कुल्ला मंत्रालय ने कहा कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के रोगी या हाइपरटेंशन, मधुमेह, हृदय रोग, फेफड़ा या लीवर या गुर्दे जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को चिकित्सक के परामर्श से ही गृह पृथक-वास में रहना चाहिए. ऑक्सीजन सैचुरेशन स्तर में कमी या सांस लेने में दिक्कत आने पर लोगों को अस्पताल में भर्ती होना चाहिए और डॉक्टर से तुरंत परामर्श लेना चाहिए. संशोधित दिशानिर्देश के मुताबिक रोगी गर्म पानी का कुल्ला कर सकता है या दिन में दो बार भांप ले सकता है. दिशानिर्देश में कहा गया है, ‘‘अगर बुखार पैरासीटामोल 650 एमजी दिन में चार बार लेने से नियंत्रण में नहीं आता है तो चिकित्सक से परामर्श लें, जो अन्य दवाएं जैसे दिन में दो बार नैप्रोक्सेन 250 एमजी लेने की सलाह दे सकता है.’’ इसमें कहा गया है, ‘‘आइवरमैक्टीन (प्रतिदिन 200 एमजी प्रति किलोग्राम खाली पेट) तीन से पांच दिन देने पर विचार किया जा सकता है.’’ उन्होंने कहा कि पांच दिनों के बाद भी लक्षण रहने पर इनहेलेशन बडसोनाइड दिया जा सकता है. मंत्रालय ने कहा कि रेमडेसिविर या कोई अन्य जांच थेरेपी चिकित्सक द्वारा ही दी जानी चाहिए और इसे अस्पताल के अंदर दिया जाना चाहिए.
‘घर पर रेमडेसिविर ना लगाएं’ दिशानिर्देश में कहा गया है, ‘‘घर पर रेमडेसिविर खरीदने या लगाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए. मामूली बीमारी में ओरल स्टेरायड्स नहीं दिया जाता है. अगर सात दिनों के बाद भी लक्षण (लगातार बुखार, खांसी आदि) रहता है तो चिकित्सक से परामर्श करें जो कम डोज के स्टेरायड दे सकते हैं.’’

संशोधित दिशानिर्देश में कहा गया है कि लक्षण नहीं होने का मामला प्रयोगशाला से पुष्ट होना चाहिए, जिसके तहत लोगों में किसी तरह के लक्षण नहीं होने चाहिए और उनमें ऑक्सीजन सांद्रता (Saturation) 94 फीसदी से अधिक होनी चाहिए, जबकि मामूली लक्षण वाले रोगियों को सांस लेने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए और उनकी ऑक्सीजन सांद्रता 94 फीसदी से अधिक होनी चाहिए.



Source link

Leave a Reply