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भास्कर नॉलेज सीरीज: होम आइसोलेशन में लक्षणों की तीव्रता और मरीज की मेडिकल हिस्ट्री के हिसाब से दवा बदलते हैं, डॉक्टर से पूछकर ही दवा लें


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  • At Home Isolation, The Medicine Changes According To The Intensity Of Symptoms And The Medical History Of The Patient, Ask The Doctor Only.

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3 मिनट पहलेलेखक: पवन कुमार

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  • संक्रमण अब हवा में है, होम आइसोलेशन में रह रहे मरीज के घर पर बाकी सदस्य हमेशा मास्क पहनें
  • 4 दिन में बुखार न उतरे, ऑक्सीजन लेवल या अन्य पैरामीटर्स गड़बड़ हों तो तुरंत डॉक्टर से बात करें
  • बीमारी के लक्षण नहीं होने के 3-5 दिन बाद संक्रमण जांचने के लिए आरटी-पीसीआर जांच करा सकते हैं

कोरोना के ज्यादातर मरीजों को अब होम आइसोलेशन में ही रखा जा रहा है। मगर इसके सही तरीके और मरीज की देखरेख को लेकर कई भ्रांतियां हैं। हर घर में स्थितियां आदर्श भी नहीं हैं। इन्हीं विषयों पर ICMR की कोविड-19 टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. प्रो. नरेंद्र अरोड़ा से बातचीत की। जानिए एक्सपर्ट की राय…

होम आइसोलेशन का प्रोटोकॉल क्या है?
मरीज के लिए अलग से कमरा हो। कमरे से हवा के आने-जाने की व्यवस्था हो। मरीज के लिए शौचालय की अलग व्यवस्था हो। मरीज घर से बाहर न जाए। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए घर के दूसरे सदस्यों को भी घर से बाहर नहीं जाना चाहिए। यदि बहुत जरूरी हो तो बिना मास्क के नहीं निकलना चाहिए।

आज आदर्श स्थिति के बिना होम आइसोलेशन ही दिया जा रहा है, फिर बचाव कैसे होगा?
संक्रमण अब हवा में है। ऐसी स्थिति में सरकारी क्वारैंटाइन सेंटर से बेहतर होम आइसोलेशन है। मगर ज्यादातर शहरी घरों में आदर्श स्थिति नहीं है। इसीलिए कहा जा रहा है कि बाकी सदस्य भी घर में हर समय मास्क पहनें। शौचालय एक ही है तो मरीज के शौचालय इस्तेमाल करने के बाद उसे अच्छी तरह साफ करना चाहिए। 10 से 15 मिनट शौचालय को कोई दूसरा इस्तेमाल न करे।

होम आइसोलेशन में मरीजों को किन हेल्थ फैक्टर्स की मॉनिटरिंग करनी चाहिए?
मरीज को फीवर के अलावा ऑक्सीजन की मात्रा को जांचते रहना चाहिए। यदि ऑक्सीजन का स्तर 94 से कम है तो बिना देरी किए डॉक्टर्स से संपर्क करना चाहिए। अधिक से अधिक तरल पदार्थ लें। संतरे का जूस और मूंग दाल कम से कम दो छोटी कटोरी लें। ताजे फल खाएं।

होम आइसोलेशन में क्या दवाएं लेनी चाहिए?
ये दवाएं अभी डॉक्टर दे रहे हैं-
लक्षण रहने तक
– एजिथ्रोमाइसिन 500 एमजी, दिन में एक बार।
– जिंकोविट प्रतिदिन एक।
– विटामिन सी की टैबलेट प्रतिदिन एक।
– गुनगुना पानी से गार्गल, दिन में तीन बार।
– दिन भर में 4 बार ऑक्सीजन लेवल जांचें।
इनके अलावा
– आइवरमेक्टिन 12 एमजी, 3 दिन तक, दिन में 1 बार।
– बुखार होने पर पेरासिटामोल, 650 एमजी।
हालांकि मरीज में लक्षणों की तीव्रता और उसकी मेडिकल हिस्ट्री के हिसाब से दवाएं बदली जाती हैं। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से पूछ लें।

होम आइसोलेशन में अगर चार दिन तक दवा लेने के बाद भी बुखार न उतरे, तो क्या करें?
संक्रमित व्यक्ति को कई बार बुखार चार दिन से ज्यादा रह सकता है। शरीर के दूसरे पैरामीटर ठीक हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है, लेकिन दूसरे पैरामीटर में गड़बड़ी है तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही दूसरी दवा लें।

होम आइसोलेशन शुरू होने के कितने दिन बाद आरटी-पीसीआर टेस्ट कराना चाहिए, इसमें पहला दिन किसे मानें? जांच के लिए सैंपल देने का दिन या टेस्ट रिपोर्ट आने का दिन?
दवा का कोर्स खत्म होने के बाद या बीमारी के लक्षण नहीं होने के तीन से पांच दिन बाद संक्रमण जांचने के लिए दोबारा से आरटी-पीसीआर जांच करा सकते हैं। इसके बाद यह मान लिया जाता है कि व्यक्ति संक्रमित नहीं है। केन्द्र सरकार के नए प्रोटोकॉल के अनुसार संक्रमण मुक्त होने के लिए आरटी-पीसीआर को अनिवार्य नहीं किया है।

जब मरीज होम आइसोलेशन में हो तो क्या परिवार के अन्य सदस्यों को भी आरटी-पीसीआर टेस्ट कराना चाहिए, कब कराएं?
घर के दूसरे सदस्यों को भी टेस्ट कराना चाहिए। लक्षण हो तो तुरंत कराएं और लक्षण न दिखे तो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के सातवें से 10वें दिन के बीच जांच कराएं।

क्या होम आइसोलेशन सही है? इससे संक्रमण फैलने की आशंका नहीं है?
हल्के लक्षण वाले कोरोना मरीजों के लिए सबसे योग्य स्थिति होम आइसोलेशन ही है। इससे संक्रमण फैलने की आशंका तो होती है इसलिए परिवार के दूसरे सदस्यों को भी मास्क पहनने के लिए कहा जाता है। सरकारी आइसोलेशन सेंटर में पहले मरीजों को रखा जाता था लेकिन वहां की स्थिति और मरीज की जरूरतों को देख तय किया गया है कि हल्के लक्षण वाले मरीजों का घर पर बेहतर इलाज किया जा सकता है।

मरीज के घर में यदि कोई बुजुर्ग या अन्य बीमारी से पीड़ित हो और कोरोना मरीज के लिए अलग कमरा न हो तो क्या करना चाहिए?
ऐसी स्थिति में कोरोना मरीज को हर हाल में क्वारैंटाइन सेंटर या दूसरे आइसोलेशन सेंटर में भेजना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो बुजुर्ग की जान को रिस्क में डाला जा रहा है।

मरीज के लिए अलग रसोई का प्रबंध न हो तो उसे खाना देने में क्या सावधानी बरतनी होगी?
संक्रमित व्यक्ति के लिए अलग से रसोई की व्यवस्था जरूरी नहीं है। उनके खाने का बर्तन सिर्फ अलग होना चाहिए। कोशिश यही करनी चाहिए कि यदि संक्रमित व्यक्ति ही अपना बर्तन साफ करे तो ज्यादा अच्छा होगा। मरीज को घर का कोई भी दूसरा सदस्य मास्क लगा कर उचित दूरी बना कर खाना पहुंचा सकता है।

अब कहा जा रहा है कि वायरस हवा के जरिए फैल सकता है। ऐसे में यदि संक्रमित व्यक्ति एक कमरे में आइसोलेट हो तो भी क्या बाकी सदस्यों को दूसरे कमरे में संक्रमण नहीं हो सकता?
बिल्कुल हो सकता है। दरअसल अब वायरस कुछ हद तक हवा में भी मौजूद है। लिहाजा परिवार के दूसरे सदस्यों को भी न सिर्फ मास्क बल्कि घर में भी एक-दूसरे से शारीरिक दूरी बना कर रहना चाहिए। इसे हल्के में न लें, यही बचाव है।

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