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Pawan Dwivedi September 16, 2020

लोकतंत्र देश के सर्वांगीण विकास की पहिया हैं :… आनन्द पाठक

आज अंतराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाया जा रहा इस दौरान ऑनलाइन परिचर्चा में अपनी बात रखते हुए शिक्षक आनन्द पाठक ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने 2007 में सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर यह दिवस मनाने का फैसला लिया फिर 15 सितम्बर 2008 से हर वर्ष 15 सितम्बर को मनाया जा रहा है । इस संदर्भ में आज अपने देश के संविधान के बदलतें स्वरूप 1950 में क्या थी और आज 2020 में किस दिशा में ले जाने का प्रयास कर रहे हैं । क्योंकि 1950 में भारत की हालात कुछ अलग थी और 2021 में कुछ और होगा । उस समय आरक्षण जरूरी था लेकिन आज उस पर समीक्षा करना जरूरी है ।मेरे विचार से यदि कोई बालक आरक्षण पाकर लेवल एक का अधिकारी या कर्मचारी बन गया तो उसके परिवार का आरक्षण समाप्त कर देना चाहिए क्योंकि नौकरी पाने के बाद उसके घर की आय और जीवन स्तर दोनो बढ़ जाता है । इस पर सबको मंथन और चिंतन करना होगा ।
किसी भी देश के संविधान में दिन – प्रतिदिन संशोधन होते हैं तो यह कदम आदर्श संबिधान का सूचक नही हैं । सरकार की नीतियां शिक्षित युवाओं को किस मोड़ पर ले जाकर छोड़ना चाहते हैं इसका अंदाजा आने वाले कुछ वर्षों में लगाया जा सकता है तथा इसका दूरगामी असर देखने को मिलेगा हो सकता है बढ़ती बेरोजगारी और गलत नीतियों के चलते गलत परिणाम भी मिले , और यदि प्रयोग सफल रहा और सरकार द्वारा आत्मनिर्भर बनाने का सपना साकार हुआ तो विश्व में परचम लहराया जा सकता है ।
सरकारी वनाम संविदा कर्मचारियों के लिए सरकार की क्या तैयारी है ? क्या अधिकांश युवा वेरोज़गार अपनी जवानी सड़क और जेल में काटने के लिए मजबूर हो जायेगे ।
इसका भी असर संक्रमण काल 2021 – 2025 मे जरूर देखने को मिलेगा । नए राजनीतिक प्रयोग से नए भारत में क्या बदलाव होगा जरूर दिखाई देगा ।
यदि सरकार की नीतियों के कारण शिक्षित वेरोजगारी बढ़ी , यदि निजीकरण असफल हुआ । यदि सरकारी कंपनियों एवं संस्थानो को निजीकरण के हाथों में दिया गया और वो मनमानी करने में जुट गए तो इसका विकराल और अविष्वसनीय परिणाम देखने को मिल सकता है । भारत के कुछ क्षेत्रों में जहाँ रोजगार के अवसर काम है , उद्योग धंधो का अभाव है वहा चिंता का विषय बन सकता है और कुछ क्षेत्रों में जहाँ उधोगों की भरमार है वह निजीकरण होने से ठेकेदारों को माला माल बनने का अवसर मिलेगा ।
फिलहाल आज अंतराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के अवसर पर आनन्द पाठक जी ने बताया कि विश्व मे सबसे बड़ा और लचीला संबिधान भारत का हैं जिसमें लगभग सभी मुख्य देशों के संविधान का अंश समाहित है । आज के दौर को देखते हुए उसमे व्यापक रूप से संशोधन करने की आवश्यकता है । क्योंकि हर क्षेत्र में लोकतंत्र को लोकप्रिय बनाने के लिए एक आदर्श कानून की व्यवस्था करना बहुत जरुरी है ।

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