Domain Regd. ID: D414400000 002908407-IN Editor - vinayak Ashok Jain (Luniya) 8109913008

सरकार के शिकंजे से बाहर है स्वास्थ माफिया

किसी भी विकसित देश के आधार स्तम्भों में एक होता है स्वास्थ और भारत जैसे 130 करोड़ कि आबादी वाले देश में तो बेहद अहम् भूमिका निभाती है स्वाथ स्तम्भ किन्तु दुःख इस बात का है कि हमारे देश में केंद्र हो या राज्य सरकार दोनों के ही शिकंजों से बाहर है देश का स्वास्थ स्तम्भ और वो अब एक विकसित माफिया का स्वरुप ले लिया है। आज हमें हमारे देश के स्वास्थ स्तम्भ को स्वास्थ माफिया के नाम से इसलिए सम्बोधित करना पड़ रहा है क्यों कि इन स्वास्थ व्यवसायी संस्थानों के पास इंसान के प्राणों कि कोई कीमत नहीं है यहाँ तो इंसान के मृत देह का भी पैसा वसूल करती है यह स्वास्थ संस्थान जो कि अब कॉर्पोरेट हाउस का रूप धारण कर चुकी है। वर्तमान में देश सहित समूचा विश्व कोरोना (कोविद १९) कि मार सह रहा है तो कुछ देश इस महामारी से बाहर निकलने में सफल हुआ है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारे देश में भी कोरोना योद्धा के रूप में निस्वार्थ भाव से स्वास्थकर्मियों ने अपना श्रेष्ठ योगदान दिया है किन्तु निजी अस्पताओं में कॉर्पोरेट और व्यवसायियों ने इस महामारी को भी आय का एक बड़ा स्त्रोत बना लिया जिसका परिणाम स्वरुप ऑन थे स्पॉट पैसे हॉस्पिटल में जमा नहीं करवाने के कारण मरीज एम्बुलेंस में ही दम तोड़ने पर मजबूर हो रहा है तो कही मरीज का मृत देह परिजन को अंतिम दर्शन के लिए झलक दिखाने का भी हजारो रुपये का डिमांड किया जा रहा है तो वहीँ दूसरी और सोशल मीडिया में जेटी से वायरल होता वीडियो में एक और स्वास्थ विभाग कि दरिंदगी भरी तस्वीर सामने आयी है जिसमे कोरोना मरीज का किडनी, लिवर, हार्ट सहित आर्गेन को निकल कर उसे प्लास्टिक में लपेट अंतिम संस्कार के लिए भेज दिया जाता है ऐसे में सवाल यह है कि क्या वायरल वीडियो में दर्शाये मरीज कि मृत्यु कोरोना से हुई या कीमती ऑर्गेन के चक्कर में मरीज को मार दिया गया और उसके ऑर्गेन को निकल लिया गया। वहीँ छत्तीसगढ़ कि मीडिया में एक और दिल दहलादेने वाली स्वास्थ विभाग कि घटना सामने आयी है जिसमे एक नामी कंपनी एक्सपाइरी दवाइयों को रिपैकिंग कर बाजार में पुनः बेचने कि योजना बना चूका था किन्तु मीडिया ने उसका भांडा फोड़ कर दिया। अब ऐसे में यही मरीज ऐसे एक्सपायर दवाओं का सेवन करे तो क्या उस मरीज कि स्वास्थ सुधरेगा या और अन्य बीमारी कि चपेट में आने कि सम्भावनाये बढ़ जाएँगी यहाँ यह एक्सपाइरी दवाये ग्रामीण एवं अविकसित क्षेत्रों में द्वारा दुकानदारों के द्वारा भी बेख़ौफ़ बेचा जा रहा है जिसका परिणाम मरीज के स्वास्थ पर बहुत बुरा असर छोड़ रहा है। इन सब कृत्यों को देख कर ऐसा लगता है कि देश में केंद्र कि सरकार हो या राज्यों कि सरकारें सभी के नाक के निचे से स्वास्थ माफिया अपने कारोबार को पाल पोस रहे है किन्तु सरकार के शिकंजे इतने बड़े नहीं कि वह इन स्वास्थ माफियाओं को अपनी गिरफ्त में ले लें। यहाँ एक बात और आपको अवगत करवा दें कि प्रायवेट प्रेक्टिस करने वाले डॉक्टरों कि फीस वर्तमान में १००० से २५०० तक हो चुकीं है जो कि पूर्णतः नगद में व्यवहार करते है जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं होता वहीँ अधिकतर अस्पताल पूर्ण राशि पक्का में (एक नंबर ) में नहीं स्वीकार्य करते है वहीँ पक्का में ना बिल प्रदान करते है ऐसे में प्रतिदिन का करोड़ो रुपयों का अस्पताल और प्रायवेट प्रेक्टिस वाले डॉक्टरों के द्वारा सरकार को टैक्स में भी चुना लगाया जा रहा है तो यहाँ या बोलना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि अधिकांश चिकित्सकों एवं स्वास्थ माफियाओं का देश के विकास में नाम मात्र भी योगदान नहीं है …. – विनायक अशोक लुनिया, प्रधान संपादक

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