Domain Registration ID: D414400000002908407-IN Editor - vinayak Ashok Jain (Luniya) 8109913008
Shobhit Jain August 23, 2019

विदिशा से संभाग हेड शोभित जैन की रिपोर्ट

दूसरों के उपदेश से प्रभावित होकर कभी खोटे मार्ग का अनुसरण मत करना, सबसे पहले व्यक्ती के आचरण को देखना यदि उसका आचरण ही सम्यक् नही हें, तो उसका मन से वचन से और काया से कभी भी समर्थन न करें
उपरोक्त उदगार आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज ने शुक्रवार को जैन भवन किरी मौहल्ला में आचार्य श्री समन्तभद्र स्वामी रचित श्री रत्नाकरंडक श्रावकाचार ग्रन्थ की कारिका अमूढदृष्टीअंग पर अपने व्याख्यान देते हुये कहे।
उन्होंने कहा कि धर्म के वास्तविक स्वरुप को न जानकर जिसने जो कहा उसी को धर्म मानना ही हमारी अज्ञानता और मूर्खता हैं, जिसे शास्त्रोक्त भाषा में मूढ़ता कहा गया हैं।
यदि हम आगम के अनुसार संसार में चलें,तो हमें कोई भी कुत्सित मार्ग पर नही चला सकता और न ही हम धोखा खा सकते। जिसका आचरण ही सम्यक् नही हैं, यदि वह उपदेशक बन कर उपदेश दे रहा हैं, तो उसका उपदेश कार्यकारी नही हैं,
वह स्वं तो कुत्सित मार्ग पर चल ही रहा हैं, और यदि उससे प्रभावित होकर हमने भी समर्थन कर दिया तो, वह तो पतन की ओर जाऐगा ही, हमारी आत्मा भी पतन की ओर चली जाएगी। वह तो दुःख भोगेगा ही, इस जीव को इस जन्म सहित भवभवांतर दुःख भोगना पड़ते हें।

बुन्दैलखंडिओं में एक कहावत हैं “खुद डूबे सो डूबे ले डूबे श्रीमान”

जो खोटे मार्ग पर चलते हैं एवं उनका समर्थन करते हैं वे स्वं तो डूबते ही हैं एवं अपने समर्थकों को भी डूवो देते हैं
इसलिये न तो स्वं खोटे मार्ग पर चलो और न ही कभी मन वचन और काय से उस खोटे मार्ग की प्रशंसा और अनुसरण कर मिथ्या मार्ग की पुष्टी करो
उन्होने कहा कि खोटे मार्ग का समर्थन करने में आजकल सोशल मीडिया भी पीछे नही हैं,
जरा कंही कोई चमत्कार की घटना दिखी और उसे जोर शोर से वाट्सएप और फैसबुक के माध्यम से समूचे विश्व में फैला देते हैं, ये विचार नही करते हैं कि इसका प्रभाव क्या होगा!
बिना सोचे समझे और जाने अनजाने में किसी भी मिथ्यामार्ग का समर्थन आपने कर दिया तो वह न जाने कितने लोगों का भविष्य बिगाड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और मीडिया का उपयोग सत्य के समर्थन में तो करें।
लेकिन असत्य और भ्रम को फैलाने एवं खोटे मार्ग के अनुसरण में सहयोगी न बनें
वाट्सएप और फेसबुक पर किसी भी बात की सच्चाई जाने बिना फार्वर्ड न तो स्वं करें और न दूसरों को प्रेरित करें
उन्होंने कहा कि विपरीत श्रद्धा ज्ञान और आचरण के कारण ही मार्ग मिथ्या हो जाता हैं,
एवं कू तत्व की सेवा करने से ही विपरीत मार्ग की पुष्टी होती हैं।
उन्होंने एक हास्यकथा सुनाते हुये कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर राजा की सवारी निकल रही थी मार्ग को स्वच्छ और साफ कर चमकाया गया था लेकिन तभी अचानक एक कुत्ता आकर विष्टा कर देता हैं।
स्वागत में खड़े महामंत्री की निगाह उस विष्टा पर पड़ती हैं,
तो वह यह सोचकर कि राजा कि निगाह उस गंदगी पर न पड़े, तो वह अपने हाथ में ली हुई स्वागत की माला को उस पर डाल कर वंहा से अन्य दरवारिओं को छोड़कर राजा के स्वागत में आगे बड़ जाता हैं।
महामंत्री को माला डालते देख। बिना कोई सच्चाई की जानकारी लिये उसका अनुसरण में अन्य दरवारी और आम जनता भी उस स्थान पर माला डालते चले जाते हैं।
थोडी़ देर में राजा की सवारी वंहा पर पहुंचती हैं, राजा देखता हैं कि जो लोग उसके स्वागत में माला लिये खड़े थे वह अपनी मालाओं को बीच चौराहे पर उस स्थान विशेष पर डाल रहे हें,
वह भी आश्चर्य चकिया हो जाता हैं, कल तक तो इस स्थान पर कुछ भी नही था
आज यंहा पर कौनसा नया स्थान बन गया।
और राजा स्वं नीचे उतर कर उस घटना की जानकारी लेते हैं, एवं महामंत्री जी को सत्यता जानने के लिये बुलाया,जब महामंत्री जी आए और उन्होंने उस स्थान और उस पर पडी़ मालाओं को देखा तो वह पूरा माजरा समझ गये। उन्होंने राजा से माफी मांगते हुये एवं सही बात बताते हुये कहा कि में नहीं जानता था कि मेरी एक गलत क्रिया को ढंकने से इस प्रकार से लोग उसका अनुसरण करने लगेंगे।
आचार्य श्री ने कहा कि हालांकि यह हास्यकथा हैं ,लेकिन यह हास्यकथा भी हम सभी को संकेत देता हैं कि भले ही कोई भी कितना प्रतिष्ठित व्यक्ती भी यदि किसी मार्ग का समर्थन कर रहा हैं, और यदि आपको संदेह हैं तो उस पर श्रद्धा करने से पहले उसकी सच्चाई को जानना आवश्यक होता हैं।
आचार्य भगवन् कहते हें, कि मन का नही दिखता लेकिन वचन से और काया से तो दिख ही जाता हैं।
यदि आप किसी स्थान पर पहुंचे और आपने किसी मिथ्यामार्ग की धारणा का सिर हिलाकर या अपने वचनों से गुणगान कर दिया तो आजकल सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से न जाने संसार में कंहा कंहा तक वह बात पहुंच जाऐ और लोग उसका अनुसरण कर एक नया मार्ग चालू कर देवें। हां आजकल लोगों का कोई ठिकाना नही हैं।
कछु लोग तो जानबुझ कर अंधे बन जाते हें,

जान बूझकर अंध बने हैं,आंखन बांधी पाटी, जिया जग धोखे की टाटी


हमने सब कुछ पड़ा हैं, समीचीन मार्ग को भी जानते हैं, उस मार्ग को समझा हैं सुना हैं और विश्वास भी किया हैं, लेकिन जब हमारे जीवन में कभी कोई घटना घटती हैं, और हम उस समी चीन मार्ग को छोड़कर मिथ्यामार्ग का समर्थन करने चल पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि अंध विश्वास की ऐसी कई घटनाएं आपको समाचार पत्रों और लोगों से सुनने को मिल जाती हैं। जिन पर सहज विश्वास नही होता।
उन्होंने कहा कि तत्व के वास्तविक स्वरुप को न जानकर यदि हमने विपरीत ज्ञान का समर्थन कर दिया तो यही हमारी अज्ञानता और मूर्खता होती हैं, और इसी को शास्त्रों में मूढ़ता कहा गया हैं, तत्व और कुतत्व को देखें एवं सच्चे रास्ते को प्रदर्शित करने वाले परमार्थभूत देव परमार्थभूत शास्त्र और परमार्थभूत आगम के अनुसार संसार में चलें, तो हमें कोई भी भटका कर कुत्सित मार्ग पर नही चला नही सकता।
यदि हमारा आचरण सम्यक् नही हैं तो कोई भी हमें कुत्सित मार्ग की ओर ले जा सकता हैं।
जिससे यहआत्मा पतन की ओर चली जाती हैं।
जिससे इस जीव को इस भव में और पर भव में दुःखों को भोगना पड़ता हैं।
उपरोक्त जानकारी श्री सकल दि. जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन ने दी।कार्यक्रम का संचालन मुकेश जैन बड़ाघर ने किया।

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