एक नज़र मध्यम वर्ग की ओर

आज हमारा राष्ट्र ही नहीं सम्पूर्ण विश्व एक महा संकट से गुज़र रहा है| हर दिन एक नई चुनौती एक नई आशा के साथ उदय होता है | कही करोना का कहर तो कहीं उसके कारण अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा उसकी चर्चा है | संसार के सभी राष्ट्राध्यक्षों में कोई न कोई फ़ैसले लिए हैं जिससे उनकी जनता सुरक्षित रहे, और कई क़दम उठाए हैं, और सहुलते दी है ताकि अर्थव्यवस्था भी चरमराये नहीं | हमारे देश ने भी काफ़ी सराहनीय कदम उठाए हैं ताकि करोना का कहर न्यूनतम हो और इसके लिए हमारे प्रधानमंत्री की प्रशंसा विश्व स्तर पर की जा रही है|
हमारे प्रधानमंत्री, रिज़र्व बैंक, वित्तीय तथा अन्य मंत्रालयों ने काफ़ी बड़े – बड़े फ़ैसले लिए हैं जिससे करोना के कारण उत्पन्न संकट का न्यूनतम असर अर्थव्यवस्था पर पड़े| परंतु इन सभी उपाय वो मैं उन सभी मंत्रालयों ने एक बहुत बड़े वर्ग को नज़रअंदाज़ कर दिया है| मध्यम वर्ग जो की हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है उसे भुला दिया है| सरकारी या बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में कार्यरत मध्यम वर्ग को शायद उतना क़हर न सहना पड़े परंतु छोटे-मोटे मध्यमवर्गीय व्यवसायी तथा उन पर आश्रित कर्मचारी एवं उद्योग – धंधे करोना के क़हर से नहीं बच पाएंगे यदि सिर्फ़ अभी दी हुई रियायतों को देखा जाए तो| राष्ट्र के साथ सदैव खड़ा रहने वाला यह वर्ग आज भी राष्ट्र हित में बलिदान देने के लिए तत्पर है और आज भी दान की बात हो यथा सक्षम ये वर्ग दे रहा है इस बीच विषम परिस्थिति में भी फ़ूड पैकेट बाँट रहा है परंतु यह वर्ग परेशानी झेल रहा है और निकट भविष्य में झेलने वाला है| पहले से ही नौकरशाही से प्रतारित और ई -कॉमर्स की कंपनियों के कारण प्रभावित लॉकडाउन उनके लिए एक बहुत बड़े आभिशाप के रूप में आया है| एक तरफ़ तो निश्चित व्यय तय हैं और फ़िलहाल आय का कोई साधन नहीं सरकार के निर्देशों के अनुसार तथा मानवीय मूल्यों को ध्यान में रख वे अपने कर्मचारियों की तनख़्वाह भी देना चाहते हैं परंतु उनके लिए कोई ख़ास रियायत नहीं| ओवरड्राफ्ट का इस्तेमाल करने वाले व्यापारियों को ब्याज हर महीने उसी प्रकार देना पड़ रहा है| उसके अतिरिक्त होम लोन वाहन लोन आदि पर जो झूठी छूट दी हुई है वो भी एक तरह से उनकी कमर तोड़ने वाली ही है| बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने जो ऋण स्थगन का प्रावधान रखा है वह तो उनके लिए एक अतिरिक्त कमाई की योजना मात्र लगती है|
यह व्यापारी वर्ग पिछले दो तीन वर्षों से काफ़ी तरह से जूझ रहा है एक तरफ़ छोटे कस्बों में और पुराने व्यापारी जो कंप्यूटर पर सॉफ़्टवेयर चलाना नहीं जानते हैं वे GST रिटर्न भरने के लिए एकाउंटेंट पर निर्भर है और भूल से भी उससे कोई गलती हो जाए तो अफ़सरों के आगे – पीछे घूम घूमकर एक अलग तरह की प्रताड़ना झेलते हैं | ऊपर से ई कॉमर्स की कंपनियों का प्रिडेटर्री रवैया और अब रहा सहा कसर इस करोना के कारण लॉकडाउन ने निकाल दिया|
इस तबके के लिए अब वित्तीय विभाग तथा अन्य मंत्रालय, रिज़र्व बैंक, प्रधानमंत्री जी को संज्ञान लेना चाहिए| क्योंकि इससे केवल ये लोग ही प्रभावित नहीं होंगे बल्कि इनके प्रभावित होने से एक अलग तरह की श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू होगी और जिसके परिणाम स्वरूप बेरोज़गारी तो बढ़ेगी ही GDP पर भी काफ़ी प्रभाव पड़ेगा और अर्थव्यवस्था और भी चरमरा जाएगी| आने वाले समय मे राष्ट्र को आर्थिक संकट से उबारने में इन मध्यम वर्गीय परिवारों का काफ़ी योगदान रहेगा| अत: मेरा सभी मंत्रालयों और वित्तीय संस्थानों से निवेदन है कि इनको भी सही सहूलियतें और रियायतें भी जाए ताकि इस उपेक्षित वर्ग पर करोना संकट के कारण आने वाले वित्तीय संकट का असर असर कम से कम हो| साथ ही निवेदन है कि ई कॉमर्स के प्रिडेटर्री रवैये पर नकेल कसा जाए और नौकरशाहों की दो तरफ़ा मार से बचाया जाए| इनके हितों को नज़रअंदाज़ करके अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना मुमकिन नहीं होगा साथ ही सही मायने में अर्थव्यवस्था का विकास तभी हो सकता है जब इनकी कठिनाइयों को समझा और उसके अनुरूप निर्णय लेकर इनके साथ-साथ राष्ट्र के आर्थिक हितों की रक्षा की जाए| अभी काफ़ी ज़रूरी है कि भारत जल्द से जल्द करोना के कारण आने वाले आर्थिक संकट से ऊबरे क्योंकि हमारे प्यारे भारतवर्ष पर अभी पूरी संपूर्ण विश्व की नज़र है| -अमित जैन “सह संपादक बेंगलुरु”

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