पाप से डरोगे तो पुण्य स्वतः इकट्ठा हो जायेगा : मुनि श्री

विदिशा से संभाग हेड शोभित जैन की रिपोर्ट

विदिशा संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के परम साधक शिष्य मुनि श्री पवित्र सागर एवं मुनि श्री प्रयोगसागर महाराज से श्री सकल दि. जैन समाज के द्वारा चातुर्मास हेतु निवेदन कर श्री फल अर्पित किये गये।
श्री सकल दि. जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष डा. राजीव चौधरी, शेलेंद्र चौधरी सहित समस्त पदाधिकारीओं एवं विदिशा नगर के विभिन्न जिनालयों के टृस्टिओं एवं पदाधिकारियों ने पूज्य मुनिद्वय के चरणों में श्री फल समर्पित करते हुये विदिशा नगर में चातुर्मास कलश स्थापना करने का निवेदन किया।
इस अवसर पर मुनि श्री पवित्र सागर जी महाराज ने कहा कि विगत दो माह से हम लोग आपके विदिशा नगर में हैं।
आप लोगों ने चातुर्मास की भावना समाज की ओर से रखी हैं। जैसी आज्ञा पूज्य गुरूदेव की होगी उसका अनुपालन होगा।
इस अवसर पर मुनि श्री प्रयोग सागर जी महाराज ने सदगृहस्थ की परिभाषा देते हुये कहा कि एक सदगृहस्थ के प्रतिदिन करने योग्य कार्य में दान और पूजा का महत्व हैं।उन्होंने पुण्य के महत्व को बताते हुये कहा कि पाप से बचोगे तो पुण्य स्वतः एकत्रित हो जायेगा।
उन्होंने कहा कि प्रतिदिन दैनिक क्रिआओं के माध्यम से न जाने कितना पाप एकत्रित कर लेते हो कि आपका संकलित पुण्य क्षींण हो जाता हैं।
उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन में दैनिक क्रिआओं को करना भी जरूरी हैं लेकिन उन क्रिआओं को करते समय जो विवेक पूर्वक क्रिआओं को करते हैं, वह निश्चित करके अपने आपको पाप से बचाने का कार्य कर लेते हैं।
मुनि श्री ने कहा कि प्रतिदिन पांचों पाप हिंसा, झूंठ, चोरी, कुशील और परिग्रह से यत्नपूर्वक वचने का प्रयास करना चाहिये।

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