भीषण गर्मी ले रहीं जान और इधर दम तोड़ रहे जलस्त्रोत, पानी के लिए मच रहा हाहाकार

भीषण गर्मी ले रहीं जान और इधर दम तोड़ रहे जलस्त्रोत, पानी के लिए मच रहा हाहाकार
दौलत गोलानी की रीपोर्ट

झाबुआ। जिलेभर में इन दिनों एक तरफ भीषण गर्मी ने लोगों की जीना मुष्किल कर रखा है तो दूसरी ओर इस बीच लोगों को पानी की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है। कई स्थानों पर जल स्त्रोत पूरी तरह से दम तोड़ चुके है और उनमें पानी की जगह बस हवा निकल रहंी है, ऐसे में लोग बाहरी जलस्त्रोतों पर भी पहुंच रहे तो वह भी सूखे होने या सूखने की कगार पर होने से पानी के लिए जद्दोजह मच रहीं है। इस ओर पूरे ग्रीष्मकाल में शासन-जिला प्रषासन के इंतजाम नाकाफी ही रहे है। इसी को लेकर जिले में जल प्रबंधन की व्यवस्था की समीक्षा करने आगामी 14 जून को जिले के प्रभारी मंत्री सुरेन्द्रसिंह बघेल झाबुआ आ रहे है। इस दौरान वे जिला योजना समिति की बैठक लेकर इस संबंध में संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवष्यक निर्देष भी जारी करेंगे।
झाबुआ जिला जैसे सूखने की कगार पर पहुंच गया है। ग्रीष्मकाल में जिले से गुजरने वाली नदियों के साथ नालों, तालाबों में पानी नाममात्र का बचा है। मानूसन आने में अभी 10-12 दिनों की देरी है, लेकिन इससे पूर्व लही ोगों को भीषण गर्मी में पानी के लिए दो-चार होना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय झाबुआ को पानी उपलब्ध करवाने वाली अनास नदी का जलस्तर स्टापडेम से काफी नीचे आ गया है। रंगपुरा स्थित अनास नदी एवं इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित अनास नदी में पानी का जलस्तर काफी निम्न हो जाने से केवल पत्थर ही पत्थर दिखाई पड़ रहे है। यदि कुछ दिनों तक ओर पानी नहीं गिरा, तो ऐसा प्रतीत होता है कि नदी का पानी सूख जाएगा और विकराल पानी की समस्या से शरहवासियों को जूझना पड़ेगा।
तीनों तालाबों का पानी उपयोगविहीन
शहर में तीन तालाब बहादुर सागर तालाब, छोटा तालाब एवं मेहताजी का तालाब स्थित है। तीनों का पानी पेयजल के रूप मे उपयोग नहीं लिया जा सकता है, जिसका कारण तालाब में जमा गाद, कांजी, गंदगी एवं फूल-पत्तियों का डेरा लगा होना है। इन तालाबों के पानी से शहरवासी केवल अन्य कार्य कर सकते है, लेकिन पेयजल के रूप में उपयोग नहीं ले सकते। वर्तमान में तालाबों में पानी का जलस्तर भी काफी निम्न है।
बोरिंग में पानी हुआ खत्म
भीषण गर्मी में एक ओर पीएचई विभाग द्वारा 4-5 दिनों में जलप्रदाय किया जा रहा है अर्थात जल प्रदाय का समय बढ़ाया है वहीं पर्याप्त मात्रा में भी पानी नहीं मिल रहा है। इसी बीच जिन लोगों ने अपने घरों में बोरिंग करवा रखे है, वह भी सूख रहे है। ऐसे में जब लोग अपने घरों की नजदीक हैंडपंप, कुओं पर जा रहे है, तो या तो हैंडपंप मंद गति से चल रहे है, या कई हैंडपंप बंद पड़े होने से परेषानी आ रहीं है। कुआंें में भी जलस्तर नाममात्र का है। तालाबों और बावड़ियों में भी पानी कम रहने से पर्याप्त मात्रा मे लोगों को पानी की पूर्ति नहीं हो पा रहंी है। झाबुआ शहर में कई काॅलोनियों एवं गली-मौहल्लों में वर्तमान में हैंडपंप या बंद पड़े है या उनमें से मंद गति से पानी आ रहा है। कई वर्षों पुराने कुएं अपना अस्तित्व खोते हुए उनमें गिट्टी-पत्थर भरे होने के साथ देखरेख के अभाव में गंदगी का षिकार है।
ग्रामीण क्षेत्रांे में समस्या अधिक
पानी की समस्या जिले के शहरी एवं नगरीय क्षेत्रों में तो ठीक, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इस समस्या ने अत्यधिक पैर पंसार रखे है। कई ग्रामीण अंचलों के लोग भयंकर सूखे की मार झूल रहे है। जिसका कारण गांवों में स्थित तालाबों में पानी सूख जाना एवं नलकूप खननों में भी पानी नहीं रहना है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय योजना के तहत बने तालाब या तो फूट चुके है या उनमें पानी हीं बचा है। कपिल धारा कूप योजना एवं मेढ़ बंधान जैसी योजनाएं भी धरातल स्थल पर फलाॅप साबित होने से ऐसे में ग्रामीण महिला-पुरूष युवा एवं बच्चों या तो कुओं एवं तालाब किनारों पर झिरी खोदकर गंदा पानी भरकर पीने को विवष है, जिससे उनके स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंच रहा है तो कई ग्रामीण क्षेत्रों के रहवासियों को यह भी नसीब नहीं हो रहा है। कई अंचलों में रहवासी 2-3 किमी दूर स्थित हैंडपंपों एवं कुओं से पानी भरकर ला रहे है। फलोराईडयुक्त हैंडपंपों की जांच नहीं होने से उसका पानी पीकर ग्रामीणवासी बीमार भी पड़ रहे है।
पीएचई विभाग पूरी तरह से उदासीन
जिलेभर में पानी की समस्या को दूर करने में पीएचई विभाग एवं शहरी क्षेत्रों में नगरपालिका, नगरीय क्षेत्रों में नगर पंचायत तथा ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंयातयांे का रवैया सुस्त होने से जिलेवासी भयंकर पानी की समस्या से जूझने को विवष है। साथ ही जिला प्रषासन के भी पेयजल संकट दूर करने के इंतजाम नाकाफी है। ना जिला प्रषासन के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस संबंध में अब तक संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हें जिले में पेयजल समस्या दूर करने हेतु निर्देषित किया है और ना हीं कोई आवष्यक व्यवस्थाएं की गई है।
प्रभारी मंत्री आ रहे समीक्षा करने
जिले में पानी की समस्या के विकराल रूप लेने के समाचार जब मीडिया की निरंतर सुर्खियां बनने लगे है तो अब जिले के प्रभारी मंत्री सुरेन्द्रसिंह बघेल द्वारा 14 जून को झाबुआ आकर जिला योजना समिति की बैठक ली जाएगी। जिसमें बताया जाता है कि मुख्य रूप से जिले में पानी की व्यवस्था संबंधी ही समीक्षा की जाना है। अब आष्चर्य का विषय यह है कि सरकार और जिले के प्रभारी मंत्री तथा जिला प्रषासन को ग्रीष्मकाल के अंत में ही पानी की व्यवस्था संबंधी समीक्षा करना पड़ रहीं है, जबकि पूरे ग्रीष्मकाल में जिलेवासी भयंकर जल संकट से जूझे है, अब जबकि मानसून आने में 10-12 दिन का समय शेष रह गया है, तब शासन-प्रषासन की नींद खुलते हुए समीक्षा कर पेयजल व्यवस्था को दुरस्त करने के निर्देष आगामी जियोस की बैठक में प्रभारी मंत्री द्वारा प्रदान किए जाएंगे।


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