पाकिस्तान को दिवालिया होने से ट्रम्प ही बचा सकते हैं; भारत को नाराज किए बगैर अमेरिका सौदेबाजी करेगा

पाकिस्तान एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में है, अक्टूबर में तय होगा कि वो ब्लैक लिस्ट होगा या नहीं
आईएमएफ में 51% वोट अमेरिका समर्थक, ट्रम्प के इशारे पर ही मतदान करेंगे

नई दिल्ली. दिवालिया होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान के लिए अगला महीना बेहद अहम है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ अक्टूबर में निर्णायक बैठक करने वाला है। पेरिस में होने वाली इस मीटिंग में तय होगा कि पाकिस्तान को एफएटीएफ की ग्रे से ब्लैक लिस्ट में डाला जाएगा या उसे इस लिस्ट से बाहर निकालकर आर्थिक जीवनदान मिलेगा। उसे इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड यानी आईएमएफ से बेलआउट पैकेज तभी मिलेगा, जब अमेरिका चाहेगा। डोनाल्ड ट्रम्प भारत की नाराजगी मोल लिए बिना इमरान खान को सौदेबाजी पर मजबूर कर सकते हैं। पाकिस्तान के बड़े अखबार ‘द न्यूज’ ने एक रिपोर्ट में इन तथ्यों की जानकारी दी है।
अक्टूबर में होंगे दो बड़े फैसले
अगले महीने पेरिस में एफएटीएफ की मीटिंग होगी। इसमें उन कदमों का विश्लेषण होगा, जो पाकिस्तान ने कथित तौर पर आतंकवादी संगठनों के खिलाफ उठाए हैं। एफएटीएफ कार्रवाई से संतुष्ट हुआ तो ग्रे लिस्ट से बाहर आ सकता है। नहीं हुआ तो उसे ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो उसका दिवालिया होना करीब-करीब तय हो जाएगा। वो इसलिए, क्योंकि फिर आईएमएफ उसका बेल आउट पैकेज रोक देगा। आईएमएफ पाकिस्तान को 6 बिलियन डॉलर (करीब 43 हजार करोड़ रुपए) की पहली किश्त दे चुका है। इसका भी रिव्यू अक्टूबर में ही होगा और यह काफी हद तक एफएटीएफ की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।
आईएमएफ का सख्त रुख
रिपोर्ट में पाकिस्तान के एक मंत्री के हवाले से कहा गया, “हमने आईएमएफ की शर्तों पर कर्ज की पहली किश्त तो ले ली। लेकिन, इसका असर सामने आने लगा है।” इमरान के पूर्व वित्त मंत्री असद उमर के मुताबिक- आईएमएफ ने हमसे दो टूक बात की है। उसने कहा कि या तो हमारी शर्तों के हिसाब से कर्ज लीजिए या फिर छोड़ दीजिए। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पास अब कोई विकल्प नहीं है। उसे मिनी बजट पेश करना होगा। इसमें बेतहाशा महंगाई से परेशान अवाम पर नए टैक्स लगाने होंगे। नौकरियां हैं नहीं, आयात जारी है, निर्यात बंद है और सरकारी खजाना खाली है।
एक तरफ कुआं, दूसरी तरफ खाई
रिपोर्ट में आगे कहा गया है, ‘‘आईएमएफ शर्तों में कुछ ढील तभी देगा, जब अमेरिका ऐसा चाहेगा। लेकिन, अमेरिका इसके लिए तगड़ी सौदेबाजी करेगा। उसे अफगानिस्तान से फौज निकालनी है। वो पाकिस्तान पर तालिबान के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहेगा। अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने में भी पाकिस्तान का सहयोग करना पड़ेगा। एक अहम बात ये है कि डोनाल्ड ट्रम्प यह सब करते हुए भारत को नाराज नहीं करना चाहेंगे। भारत नहीं चाहेगा कि पाकिस्तान को एफएटीएफ से राहत मिले। इसलिए मामला बड़ा पेचीदा है।’’
इमरान क्या करेंगे?
रिपोर्ट में कहा गया है, इमरान 19 सितंबर को सऊदी अरब जा रहे हैं। वहां उन्हें वही सब सुनने मिलेगा, जो अमेरिका और भारत चाहते हैं। इसके बाद वो अमेरिका जाएंगे और 28 सितंबर तक वहां रहेंगे। ट्रम्प से उनकी दो बार बातचीत होगी। इस दौरान पाकिस्तान के भविष्य की रूपरेखा तय होगी। ट्रम्प ने तालिबान से बातचीत खत्म कर दी है। अब वो पाकिस्तान पर कई तरह के दबाव डालेंगे। इमरान के लिए मुमकिन नहीं कि वो अमेरिका की शर्तें नकार दें। क्योंकि आईएमएफ में यूरोपीय यूनियन और जापान समेत 51 फीसदी से ज्यादा वोटर ऐसे हैं जो अमेरिका के इशारे पर मतदान करेंगे।

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