मासूम के हाथ कलम की जगह काम, बाल श्रम कानून केवल शब्द बनकर रह गया है कोलारस में |

नेशनल डेवलपमेंट हेड अतुल जैन की रिपोर्ट

कोलारस। बाल श्रम विद्यालय कोलारस में मौजूद है परंतु वह कागजों में चल रहा है कोलारस नगर में व्यापक पैमाने पर बाल मजदूरी हो रही है श्रम विभाग की ओर से कागजी अभियान चलाकर बाल श्रमिकों के हित में कार्य किए जा रहे हैं जो धरातल पर कभी नहीं दिखते गरीब परिवारों के बच्चे स्कूल जाने की बजाय मजदूरी करने को मजबूर हैं।
जबकि सरकार की तमाम योजनाएं बाल श्रमिकों के उत्थान और पुनर्वास के लिए संचालित है कोलारस नगर में भी सदर बाजार में बाल श्रमिकों के लिए विद्यालय खुला हुआ है परंतु यह विद्यालय पूरी तरह से कागजों में संचालित किया जा रहा है और यहां पर फर्जी तरीके से बाल मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाकर प्रति महीनेबजट ठिकाने लगाया जा रहा है।
बाल मजदूरी रोकने यह है नियम 10 दिसंबर 1996 को सुप्रीम कोर्ट ने दिशा निर्देश दिए की खतरनाक उद्योगों में लगे बच्चों को वहां से निकाला जाए और उन्हें किसी शिक्षण संस्थान में दाखिला दिलाया जाए बच्चों को काम पर लगाने वाले संस्थान को हर बच्चे के लिए? 20000 रुपए बच्चों की भलाई के लिए बनाए गए वेलफेयर फंड को देने होंगे बाल मजदूरी से बचाए गए बच्चे के परिवार के एक सदस्य को रोजगार  दिया जाएगा ऐसे प्रत्येक बच्चे के लिए राज्य सरकार? 5000 वेलफेयर फंड में जमा कराए जो बच्चे खतरनाक कार्यों में नहीं लगे हैं।
उनके काम पर नजर रखी जाए और सुनिश्चित किया जाए कि बच्चा 6 घंटे से ज्यादा काम ना करें इसके साथ ही कम से कम 2 घंटे में पढ़ाई भी करें उस बच्चे की पढ़ाई पर आने वाला पूरा खर्चा उसके मालिक द्वारा बहन किया जाएगा परंतु इन सभी नियमों को एक तरफ रख कर यदि देखा जाए तो कोलारस नगर में बस स्टैंड जगतपुर सदर बाजार जेल रोड एप्रोच रोड पर किराना दुकानों होटलों चाय की दुकानोंपर बाल श्रमिक अधिक काम कर रहे हैं और प्रशासन को पता होने के बावजूद भी वह ना तो कोलारस में संचालित बाल श्रम विद्यालय और ना ही होटलोंकिराना दुकानों पर जाकर निरीक्षण करता है जिससे बाल मजदूरी को रोका जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *