दवा व्यापारी के सामने डॉ.शर्मा

अजमेर से ब्यूरो चीफ पंकज बाफना की रिपोर्ट:

कभी कोई बीमारी हो जाए ताे डॉक्टर के पास जाना लाजमी है, लेकिन कई बार सीधे दवा की दुकान पर जाकर भी आराम की बूटी मिल जाया करती है। यह निर्भर करता है उपचार की दरकार वाले किरदार पर। दरअसल यह बात यहां इसलिए की जा रही है कि केकड़ी के सियासी अखाड़े में एक डॉक्टर और दूसरा दवा व्यापारी है। यूं तो आमताैर पर डॉक्टर और दवा व्यापारी एक दूसरे के पूरक होते हैं। लेकिन यहां चुनावी अखाड़े में स्थितियां उलट है। फिर यह देखना और भी दिलचस्प होगा कि यहां केकड़ी क्षेत्र के उत्तम स्वास्थ्य के लिए जनता विशेषज्ञ चिकित्सक के पास जाती है या कैमिस्ट के पास।

केकड़ी के सियासी अखाड़े में इस बार दंगल में तब्दीली है। इस बार जुबान केसरी की जगह यहां दवा व्यापारी को लाया गया है।  इनके सामने हैं हाथ वाले तगड़े डॉ. पैतीस हजारी। ये पैतीस हजारी नाम इन्हें जुबान केसरी साब ने ही प्रदान करवाया। सालभर हाे गया यह नाम पड़े हुए। डॉक्साब गांव गांव घूमकर वर्तमान शासन काे चुनाैती के रूप में इंजेक्शन लगा रहे हैं। वहीं दवा व्यापारी अपनी सादगी और व्यवहारिकता के जरिए अपनी दवा बांट रहे हैं। क्या यह दवा यहां की हवा बदल पाएगी या फिर डॉ ही काम आएगा। पैतीस हजारी साब का कद और रुतबा उन्हें इस चुनाव में हीराे बनाए हुए हैं वहीं दवा व्यापारी साब इस चीज को हथियार बनाए हुए हैं कि मैं साधारण आदमी हंू। डॉक्टर और दवा व्यापारी में से चुनने के लिए जनता जनार्दन भी किसी खास हकीम से कम नहीं है। यहां की अपने गांव में आने वाले दोनों महानुभावाें की कद्र करने में कोई कमी नहीं छोड़ रही है। एक पार्टी विशेष का समीकरण जिस गांव में हो वहां पर भी दूसरी पार्टी विशेष के वाेट मांगने वाले काे निराश नहीं कर रही है। यह हकीमपन जादुई कहा जाएगा क्याेंकि स्वयं पैतीस हजारी साब ने भी सालभर पहले यह नहीं सोचा था वे संख्या में पैतीस हजारी पहुंच पाएंगे। जीत को लेकर वे भले ही उप इलेक्शन में कांफीडेंस में थे। लेकिन इस हकीमी जनता ने एेसा तिलिस्म बनाए रखा कि जब वह डिस क्लॉज हुआ ताे इतिहास बना गया। इसी बदाैलत केसरी साहब काे मैदान से बाहर करना पड़ गया था। ये इश्क हकीमी इस बार कितना कारगर रहता है देखना वाकई दिलचस्प हो सकेगा। अब देखना है कि यह तिलिस्मी जनता इस बार क्या गुल खिलाती है। लेकिन यहां होने वाली जीत हार यह तय करेगी कि किसका राजनीतिक करियर आगे कितना चल सकेगा। दवा व्यापारी यदि पिछड़ते हैं ताे केसरी साहब फिर से यहां विपक्ष की भूमिका में नजर आने लगेंगे वहीं दवा व्यापारी की किस्मत चेत जाती है ताे फिर केसरी साब और पैतीस हजारी साब दोनों की बड़ी परेशानी का सबब आगे के लिए तय है।

है जादुई तेवर यहां चुनावी लिहाज में 

जनता लगेगी इस दफा किसके इलाज में

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