आचार्य असंयम, उपाध्याय अज्ञान, साधु अधर्म का करते है अंत – अष्ट प्रभावक नरेन्द्र सूरीष्वरजी श्री नमस्कार महामंत्र के आराधकों के पारणे का हुआ आयोजन, चातुर्मास समिति की ओर यषवंत, निखिल, शार्दुल भंडारी परिवार ने किया आराधकों का बहुमान

आचार्य असंयम, उपाध्याय अज्ञान, साधु अधर्म का करते है अंत – अष्ट प्रभावक नरेन्द्र सूरीष्वरजी
श्री नमस्कार महामंत्र के आराधकों के पारणे का हुआ आयोजन, चातुर्मास समिति की ओर यषवंत, निखिल, शार्दुल भंडारी परिवार ने किया आराधकों का बहुमान
झाबुआ स्ंवाददाता-दौलत गोलानी की रिपोर्ट

झाबुआ। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन के पावन पर्व पर स्थानीय श्री ऋ़षभदेव बावन जिनालय स्थित पोषध शाला भवन में राजस्थान केसरी अष्ट प्रभावक परम् पूज्य आचार्य देवेष श्रीमद् विजय नरेन्द्र सूरीष्वरजी मसा ‘नवल’ ने धर्मसभा में समाजजनांे को संबोधित करते हुए बताया कि आज भारत स्वतंत्र हुआ। साथ ही आज रक्षाबंधन का पावन पर्व भी है। आज ही लोकोत्तर महापर्व में 20वें तीर्थंकर मुनिसुव्रत स्वामीजी का च्यवन कल्याण भी है।
आचार्य श्रीजी ने 15 अगस्त को ‘पढ़मं हवई मंगलम्’ पद की व्याख्या करते हुए कहा कि नवकार में नवपद, नवनिधि, नव तत्व, नवथा भक्ति, नव की अखंड संख्या है। इसी प्रकार जीवन में आराधक नवकार का आलंबन लेकर के भाव नहीं घटने देता है। नवकार में गणित है, नवकार के 68 अक्षर पुण्य माता है। संसार में गणित में 52 वर्ण माला है। नवकार में पुण्य का जोड़ है। पाप का बाकी अर्थात घटाना है। धर्म का गुणाा है और कर्म का भाग है। प्रथम पद के जाप से 2 लाख 45 हजार पल्लोपम देव सुख का आयुष्य बंधता है।
नवकार बोलने से 500 सागरोपम नरक का अंत होता है
अरिहंत मिथ्यात्व का अंत करते है। सिद्ध अनंत दुखों का अनंत करते है। आचार्य असंयम का अंत करते है। उपाध्याय अज्ञात का अंत और साधु अधर्म का अंत करते है। नवकार बोलने से 500 सागरोपम नरक का अंत होता है। सुकृत की अनुमोदना, दुष्कृत की ग्रहा और उत्तमता का स्वीकार यह नमस्कार महामंत्र का उद्घोष है। खेद रहित, भेद रहित, और छेद रहित आराधना आरघक को मोक्ष दिलवाती है।
आचार्य के स्मरण से मन सरल बनता है
आचार्य श्रीजी ने आगे बताा कि अरिहंत के अ से मन निर्मल बनता है। सिद्ध के स्मरण से मन निष्चल बनता है। आचार्य के स्मरण से मन सरल बनता है। उपाध्याय मन को सबल करते है। साधु आराधना को सफल करते है। उन्होंने कहा कि ‘‘पेट कपट जिव्हा कपट, नयना कपट विराट, तुलसी हरि कैसे मिले, घर में ओगड़ घाट’’। संसार का मंत्र स्वार्थ की पूर्ति करता है। नवकार महामंत्र परमार्थ की सम्पूर्ति करता है। मन मस्तिषक से नवकार गिरने पर जीवन मंे अनहोनी घटना घटित होती है।
श्री नमस्कार महामंत्र एवं भक्तामर महातप के तपस्वियों ने एकासने का लाभ लिया
तीन प्रकार के जाप की चर्चा करते हुए आचार्य देवेष ने कहा कि भाष्य, उपांषु और मानस जाप हाते है। प्रवचन के अंत में आचार्य श्रीजी ने भारत देष की स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए कहा कि आत्मा के अंदर परतंत्रता है। जब तक संयम में स्वतंत्रता घटना घटित नहीं होगी, जन्म-मरण की परंपरा चलती ही रहेगी। धर्मसभा में प्रन्यास प्रवर जिनेन्द्र विजयजी मसा ने भी प्रवचन दिए। संचालन श्री नवल स्वर्ण जयंती चातुर्मास समिति के अध्यक्ष कमलेष कोठारी ने किया। 15 अगस्त, गुरूवार को श्री नमस्कार महामंत्र के आराधकों एवं श्री भक्तामर महातप की तपस्या के तपस्वियों के एकासने का आयोजन हुआ। जिसमें श्री नमस्कार महामंत्र के आराधकों के एकासने का लाभ सरदारमल नाहटा परिवार ने एवं श्री भक्तामर महातप के तपस्वियों के एकासने का लाभ सोहनलाल कोठारी परिवार एवं अनोखीलाल लुणाजी, जीवनलता नाहर, आलोक नाहर, मीना नाहर परिवार रानापुर वाले हाल मुकाम मुंबई ने लिया।
श्री नमस्कार महामंत्र के आरधकों के हुए पारणे
16 अगस्त, शुक्रवार को प्रवचन नहीं हुए। दोपहर में श्री नमस्कार महामंत्र के 80 से अधिक आराधकों के पारणे हुए। जिसका लाभ चातुर्मास समिति के वरिष्ठ एवं समाजरत्न सुभाषचन्द्र कोठारी परिवार ने लिया। वहीं सभी आराधकों का बहुमान श्री नवल स्वर्ण जयंती चातुर्मास समिति की ओर से यषवंत, निखिल, शार्दुल जिनांष भंडारी परिवार ने किया। बाद प्रभावना का वितरण हुआ। 44 भक्तामर महातप की तपस्या 4 अगस्त तक चलेगी।


फोटो 001 -ः 15 अगस्त, गुरूवार को श्री भक्तामर महातप के तपस्वियों को एकासना करवाते सोहनलाल कोठारी परिवार एवं अनोखीलाल लुणाजी नाहर परिवार।


फोटो 002 -ः 16 अगस्त को श्री नमस्कार महामंत्रण के आराधकों के पारणे पर उनका बहुमान कर प्रभावना वितरित करते यशंवंत, निखिल, शार्दुल भंडारी परिवार।

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